पकने लगी तीसरे मोर्चे की खिचड़ी, हो सकता है बड़ा ऐलान!
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भले ही एग्जिट पोल के नतीजों से उत्साहित भाजपा सरकार बनाने में जुट गई हो लेकिन परदे के पीछे तीसरे मोर्चे के दल भी सक्रिय हो गए हैं।
जदयू, एनसीपी, सपा, बीजद, बसपा, एआईडीएमके, जदएस और कंग्रेस के नेताओं की बातचीत शुरू हो गई है। एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार को सभी दलों के बीच बातचीत के लिए सर्वसम्मति से अधिकृत किया गया है।
पवार जयललिता, करूणानिधि, देवेगौडा, नवीन पटनायक और जगनमोहन रेड्डी के संपर्क में हैं।
शिवसेना से भी बातचीत की संभावना
ये जानकारी देने वाले जदयू के एक नेता का कहना है कि एग्जिट पोल कुछ भी कहें तीसरे मोर्चे के सभी दल आगे की रणनीति बना रहे हैं। वाम दलों के नेता और ममता बनर्जी से भी बात हुई है।
सबका कहना है कि कल चुनाव नतीजे आने के बाद किसकी कितनी सीट आती है इसके बाद आगे की रणनीति बनेगी।
इस नेता का ये भी कहना है कि जरुरत पड़ी तो पवार को आगे करके शिवसेना से भी मराठी मानुष के नाम पर बात की जा सकती है।
क्षेत्रीय दलों का मन टटोल रही तृणमूल
तृणमूल कांग्रेस ने भी अपने स्तर पर क्षेत्रीय दलों का मन टटोलना शुरू कर दिया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी को उम्मीद है कि वर्ष 2004 और 2009 के लोकसभा चुनावों की तरह अबकी भी एग्जिट पोल के नतीजे औंधे मुंह गिरेंगे।
इसी उम्मीद के आधार पर तृणमूल कांग्रेस दूसरे क्षेत्रीय दलों का मन टटोलने में जुट गई है। पार्टी की ओर से अब तक लालू प्रसाद के राजद, मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और जयललिता की एआईएडीएमके के साथ शुरूआती दौर की बातचीत हो चुकी है। हालांकि तृणमूल नेताओं ने इसे सद्भावना बातचीत करार दिया है।
अल्वी ने भी ममता के समर्थन की बात कही
वहीं, कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने गुरुवार को कहा कि भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए सभी क्षेत्रीय धर्मनिरपेक्ष दलों को एक साथ आकर बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को नेता चुनना चाहिए।
उन्होंने यह स्वीकार किया कि कांग्रेस के लिए सरकार बनाना काफी मुश्किल है लेकिन सभी धर्मनिरपेक्ष दलों को नरेंद्र मोदी को सत्ता से दूर रखने के लिए एक साथ आना चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि सभी क्षेत्रीय धर्मनिरपेक्ष दलों को एक साथ आकर अपना नेता चुनना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी कभी भी एक धर्मनिरपेक्ष सरकार बनाने से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा कि उनका सुझाव है कि क्षेत्रीय दलों को ममता बनर्जी को नेता चुनना चाहिए, जो धर्मनिरपेक्ष, सक्षम हैं और उनकी ईमानदारी संदेह से परे हैं।