{"_id":"1f64a322da698ea082a87b47dff4a8b8","slug":"shankracharya-jayendra-saraswati-profile","type":"story","status":"publish","title_hn":"कौन हैं शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती?","category":{"title":"India News Archives","title_hn":"इंडिया न्यूज़ आर्काइव","slug":"india-news-archives"}}
कौन हैं शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती?
Updated Wed, 27 Nov 2013 05:49 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
काँची पीठ हिंदू धर्म का अनुसरण करने वालों के लिए काफ़ी महत्वपूर्ण मानी जाती है। ये पीठ दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में काँचीपुरम नगर में स्थित है।
विज्ञापन
काँची पीठ कई धार्मिक संस्थान, शिक्षा संस्थान, हस्पताल, वृद्ध लोगों के लिए घर और एक विश्वविद्यालय भी चलाती है। काँची कामकोटी पीठ के 69वें शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती का इस पद पर आसीन होने से पहले का नाम सुब्रहमण्यम था।
विज्ञापन
उन्हें वेदों के ज्ञाता माना जाता है और जून 2003 में उन्हें काँची पीठ के शंकराचार्य के पद पर आसीन हुए पचास वर्ष हो गए।
उस मौक़े पर तब भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने वहाँ एक भव्य समारोह में भाग लिया और अपने संबोधन में अयोध्या मसले के समाधान के लिए शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती की सराहना की थी।
विज्ञापन
शंकराचार्य ने अयोध्या और कुछ अन्य विवादास्पद मसलों पर विभिन्न पक्षों से बातचीत करने की पहल तो की लेकिन जहाँ ऐसा करने के लिए वाजपेयी ने उनकी सराहना की वहीं कई हल्कों में उनकी कड़ी आलोचना भी हुई।
वाजेपयी ने तो तब यहाँ तक कहा था कि शंकराचार्य ने अन्य धर्मों के लोगों का विश्वास जीता है।
1983 में जयेंद्र सरस्वती ने शंकर विजयेंद्र सरस्वती को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया।