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'केंद्र सरकार, BJP और RSS नहीं बना सकते राम मंदिर'

Mon, 01 Feb 2016 09:47 AM IST
Updated Mon, 01 Feb 2016 09:47 AM IST
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Shankaracharya Swarupanand Saraswati said Ramalay trust will build the temple.

संतों की अगुवाई में रामालय ट्रस्ट ही अयोध्या में राम जन्मभूमि स्थल पर भगवान राम के बाल स्वरूप का मंदिर निर्माण करेगा। कंबोडिया के अंकोरवाट मंदिर की तर्ज पर बनने वाले मंदिर के गर्भगृह में माता कौशल्या की गोद में विराजे राम की प्रतिमा स्थापित की जाएगी।

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ज्योतिष एवं द्वारकाशारदा पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने रविवार को इलाहाबाद पहुंचने पर अमर उजाला से बातचीत में कहा, भगवान हिंदुओं की आस्था के प्रतीक हैं। केंद्र सरकार, भाजपा और आरएसएस राम मंदिर नहीं बना सकते हैं।
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भाजपा राजनीतिक दल है और आरएसएस सामाजिक संस्था है, जिसे राम मंदिर से कोई लेना देना नहीं है। मंदिर तो रामालय ट्रस्ट ही बनाएगा। इसके लिए पूर्व प्रधानमंत्री नरसिंहा राव के कार्यकाल से प्रयास जारी है। रामालय ट्रस्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री के तर्कों को सर्वोच्च न्यायालय ने भी स्वीकार किया है। रामजन्म स्थल पर न मस्जिद थी और न बाबर ही आया।
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'रामजन्म भूमि पर बनेगा राम के बाल स्वरूप का भव्य मंदिर'

Shankaracharya Swarupanand Saraswati said Ramalay trust will build the temple.

ज्योतिष एवं द्वारकाशारदा पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती रविवार को माघ मेला क्षेत्र स्थित शिविर पहुंचे। अखाड़ा परिषद अध्यक्ष स्वामी नरेंद्र गिरि की अगुवाई में संतों और भक्तों ने उनका भव्य स्वागत किया।

शंकराचार्य के साथ ही स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती सहित शंकराचार्य के सचिव सुबुद्धानंद ब्रह्मचारी, स्वामी रामानंद ब्रह्मचारी भी मेला क्षेत्र पहुंचे। अंदावा से लेकर माघ मेले में त्रिवेणी मार्ग स्थित उनके शिविर तक पूरे रास्ते पर भक्तों ने उन पर फूल बरसाए। कई जगहों पर आतिशबाजी भी की गई।

अंदावा पहुंचने पर आचार्य विद्याकांत पांडेय कीअगुवाई में 108 पुरोहितों ने स्वस्तिवाचन किया। झूंसी मोड़ पर अखिल भारतीय दंडी संन्यासी प्रबंधन समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता आचार्य कुशमुनि के नेतृत्व में सैकड़ों दंडी संन्यासियों ने शंकराचार्य का स्वागत किया।

शोभायात्रा में ऐरावत की प्रतिमा सबसे आगे रही। उनका स्वागत करने वालों में निरंजनी अखाड़े के अम्बिका पुरी, हिंगलाज सेना की प्रमुख लक्ष्मी मणि, नील मणि, मनकामेश्वर मंदिर के व्यवस्थापक स्वामी श्रीधरानंद ब्रह्मचारी, प्रवीण नौटियाल आदि रहे। शिविर में प्रवचन के बाद शंकराचार्य मनकामेश्वर मंदिर पहुंचे।

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