फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   shami witness: A

शामी विटनेसः एक 'साइबर जिहादी' की कहानी

Sun, 14 Dec 2014 11:16 AM IST
Updated Sun, 14 Dec 2014 11:16 AM IST
विज्ञापन
shami witness: A

ट्विटर पर इस्लामिक स्टेट का प्रचार करने के आरोप में बेंगलुरु से गिरफ़्तार 24 वर्षीय मेहदी मसरूर बिस्वास ने पश्चिम बंगाल से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी और इस समय बेंगलुरु में एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम कर रहे हैं। शनिवार को जब पुलिस बेंगलुरु के उत्तरी इलाक़े में स्थित उनके एक कमरे के किराए के मकान में पहुंची तो पुलिस के अनुसार उन्होंने बिना किसी विरोध के स्वीकार कर लिया कि ट्विटर अकाउंट 'शामआईविटनेस' वही चलाते हैं।

विज्ञापन


बेंगलुरु पुलिस के उपायुक्त (अपराध) अभिषेक गोयल ने बीबीसी को बताया, "अभी तक जो जानकारी मिली है उससे लगता है कि वो स्वतः प्रेरित व्यक्ति हैं, जिसने इंटरनेट पर इस्लाम, इराक़ में इस्लामिक स्टेट, इसराइल, ग़ज़ा, सीरिया, मिस्र आदि के बारे में बहुत कुछ पढ़ रखा है।"
विज्ञापन


मेहदी के पिता डॉ. मिकाइल बिस्वास ने बीबीसी को बताया, "यह अविश्वसनीय है, मैं अभी 25 नवंबर को ही लौटा हूं। वो सुबह आठ बजे से रात नौ बजे तक नौकरी पर होते थे। वो कभी भी धर्म के बारे में बात नहीं करते थे। नमाज़ के लिए उन्हें जबरदस्ती भेजना पड़ता था। वो कैसे इस मामले में शामिल हो सकते हैं।"

विज्ञापन
विज्ञापन

ट्वीट से मिले हजारों फ़ॉलोवर्स

shami witness: A

चैनल फ़ोर ने मेहदी को चिह्नित किया और उन्हें प्रचारक बताया है। हालांकि, मेहदी अरबी नहीं जानते हैं और उन्होंने गूगल से अनुवाद के मार्फ़त सीरिया और उसके आस-पास के इलाक़े के बारे में 2003 से ही काफ़ी जानकारी हासिल की। मेहदी ने धीरे-धीरे इस्लामिक स्टेट के बारे में ट्वीट करना शुरू किया।

गोयल बताते हैं, "ट्विटर पर उन्हें इतने फ़ॉलोवर मिल गए कि वो इस वर्चुअल दुनिया की एक प्रमुख शख़्सियत बन गए।" उनके ट्विटर पर 17,000 से अधिक फ़ॉलोवर्स में आईएस के विरोधी और कुछ मीडिया संस्थान भी थे जो मेहदी के ट्वीट से ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए फ़ॉलोवर बने थे। पुलिस अधिकारी कहते हैं, "लेकिन, मेहदी का ध्यान भारत पर केंद्रित नहीं था, वो शिया-सुन्नी संघर्ष, फ़लस्तीन, आईएस व अमरीका और मिस्र के उभार के बारे में अधिक चिंतित थे और इस इलाक़े में हो रहे घटनाक्रमों से प्रेरित हुए थे।"

पुलिस अभी इस बात की जांच कर रही है कि क्या उनके कोई स्थानीय सूत्र थे या उन्होंने भारत में किसी को प्रेरित करने की कोशिश की थी। मेहदी भारत की एक बहुराष्ट्रीय कंपनी आईटीसी के फ़ूड डिविज़न में 5.3 लाख रुपए के सालाना पैकेज पर मैन्यूफ़ैक्चरिंग एक्ज़ीक्यूटिव के रूप में वर्ष 2012 से काम कर रहे थे। इस कंपनी ने उनको एक कैंपस रीक्रूटमेंट के मार्फ़त चुना था।

रात में सोशल मीडिया

shami witness: A

एक बहुराष्ट्रीय कंपनी ने मेहदी मसरूर का कैंपस सेलेक्शन किया था। बेंगलुरु के पुलिस आयुक्त एनएन रेड्डी ने बताया, "वो काम के बाद सीधे घर चले जाते थे और देर रात तक इंटरनेट पर सक्रिय रहते थे। सोशल मीडिया के मार्फ़त वो विदेशी चरमपंथियों ख़ास कर ब्रितानी चरमपंथियों से सम्पर्क में थे।"

मेहदी ने 60 जीबी प्रतिमाह डाटा का इंटरनेट कनेक्शन ले रखा था और इंटरनेट पर अपनी पहचान छिपा रखी थी। मेहदी के पिता पश्चिम बंगाल बिजली बोर्ड में इंजीनियर थे और अब सेवानिवृत्त हैं। वो अपनी पत्नी और दो बेटियों के साथ अपने गृह राज्य में ही रहते हैं।

पुलिस आयुक्त के अनुसार, ''मेहदी को आईपीसी की धारा 125, यूएएलए की धारा 18 व 39 और आईटी एक्ट की धारा 66 एफ़ के तहत गिरफ़्तार किया गया है।'' पुलिस के अनुसार, ''मेहदी मुख्य रूप से इंटरनेट पर सक्रिय थे और अभी तक उनके किसी से जुड़े होने की बात सामने नहीं आई है।''

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed