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उड़ना तो उसे अपने परों से हैः शाहरुख

Fri, 10 Jan 2014 11:25 AM IST
पंकज शुक्ल/अमर उजाला, दिल्ली
पंकज शुक्ल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 10 Jan 2014 11:25 AM IST
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Shahrukh Khan's Daughter Suhana

बेटियों से घर गुलजार होता है। इस बात का अंदाजा मुझे तब हुआ जब 13 साल पहले मेरी मन्नत पूरी हुई और मेरे घर में प्यारी सी एक लक्ष्मी आई। मेरी दुआओं और गौरी की प्रार्थनाओं का वरदान है- सुहाना।

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वक्त बदलता है। लोग कहते हैं कि पुरुष का नजरिया महिलाओं के प्रति माँ, बीवी और बेटी के रिश्तों के हिसाब से बदलता रहता है। पर, मैं इस बात से सहमत नहीं हूं। मेरी माँ से मुझे जो प्यार मिला उसी का परिणाम है कि आज मैंने इंसानियत से मोहब्बत करना सीखा।
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गौरी ने इसमें कुछ और रंग घोले और सुहाना जैसे-जैसे बड़ी होती गई, ये रंग इंद्रधनुष बनते गए। सुहाना मेरे लिए एक बेटी से ज्यादा बढ़कर एक ऐसी दोस्त है, जो मुझे कभी भी किसी भी बात पर टोक सकती है।
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आमतौर पर यह माना जाता है कि बेटे अपना करिअर अपनी मर्जी से और बेटियां माँ-बाप की मर्जी से चुनती हैं। पर, मैं ऐसा नहीं मानता। मैं इस बात को सिर्फ कहता ही नहीं बल्कि दिल से मानता भी हूं कि बेटा-बेटी एक समान होते हैं। उनमें कोई फर्क नहीं होता।

मेरे हिसाब से एक बेटी को वह सब कुछ करने देना चाहिए, जिसे करके वह भी अपना और अपने माता-पिता का नाम रोशन कर सकती है। सुहाना को पता है कि उसे जीवन में क्या करना है। उसके फैसलों पर मैंने कभी बंदिशें नहीं लगाईं।

और, बच्चे को अगर पता हो कि उसके माता-पिता उसके सपनों को पूरा करने में उसके साथ हैं, तो आमतौर पर बच्चे भी अपनी उड़ान काफी सोच समझकर ही तय करते हैं।

मैं फुटबॉल मैच बहुत देखता हूं। आर्यन को फुटबॉल से प्रेम शायद विरासत में मिला है। लेकिन, मुझे या गौरी को यह ख्याल कभी सपने में भी नहीं आया कि सुहाना भी एक दिन हमसे फुटबॉल के बारे में बातें करने लगेगी। और सिर्फ बातें ही नहीं करेगी बल्कि चैंपियन बनकर भी दिखा देगी।

फुटबॉल आमतौर पर लड़कों का खेल माना जाता है। पर, हमने सुहाना को जैसे डांस क्लासेस के लिए सपोर्ट किया वैसे ही फुटबॉल की कोचिंग के लिए भी सपोर्ट किया है।

अब मुझे लगता है कि मेरा फैसला गलत नहीं था। मेरे हिसाब से आर्यन थोड़ा शर्मीला है, पर सुहाना शुरू से ही कमांडिंग रही है। मन्नत में जब भी कोई दावत होती है सुहाना मेरे साथ ही रहती है। वह मेरे बहुत करीब है। सुहाना के लिए हर चीज सुहानी है।

उसे जीवन की पॉजिटिव चीजों से अधिक लगाव है। उसे सही और गलत में फर्क मेरा यह मानना है कि हर बेटी को सिर्फ माँ से ही नहीं बल्कि अपने पिता से भी खुलकर बातें करनी चाहिए। और, एक पिता को बेटे के करिअर के साथ-साथ बेटी के करिअर का भी ख्याल रखना चाहिए।

कई बार बेटियां अपने भाइयों को आगे बढ़ता देखने की चाहत में अपने सपनों को मार देती हैं, ऐसा नहीं होना चाहिए। कल को अगर सुहाना भी फिल्मों में आना चाहे, तो भला मैं उसे रोकने वाला कौन होता हूं? माता-पिता सिर्फ बच्चों को यह बता सकते हैं कि तुम उड़ सकते हो।


उड़ना तो उन्हें अपने परों से ही है। हम बस उनकी देखभाल करें और एक बार जैसे ही लगे कि बच्चा अब उड़ने लायक हो गया है, तो उसे आजाद होकर उड़ान भरने के लिए छोड़ देना चाहिए।

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