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मां से घर आने का वादा कर गए थे शहीद ले. कर्नल संकल्प

Sat, 06 Dec 2014 03:27 PM IST
Updated Sat, 06 Dec 2014 03:27 PM IST
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shaheed sankalp promised his mother to return home

कश्मीर घाटी के उरी सेक्टर में आतंकियों से मुठभेड़ में शहीद लेफ्टिनेंट कर्नल संकल्प कुमार अपने दोस्तों के बीच जिंदादिल इंसान के रूप में लोकप्रिय थे। करीब डेढ़ महीने पहले ही वह रांची में बूटीमोड़ स्थित अपने घर आए थे और बीमार मां से जल्द वापस आने का वादा कर गए थे।

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दो दिन पहले ही उन्होंने मां को फोन कर बताया था कि आगामी जनवरी माह में ही घाटी में उनकी तैनाती का समय पूरा होने वाला था। इससे पहले उन्हें दिसंबर में ही कर्नल पद के लिए प्रमोशन भी मिलने वाला था।
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संकल्प कुमार शुक्ल के परिवार को निकट से जानने वाले रांची निवासी उनके मित्र ने अमर उजाला को बताया कि शुक्रवार को जैसे ही जांबाज की शहादत की खबर बूटीमोड़ स्थित आवास पर पहुंची सेना के अफसरों संग उनके जानने वालों का तांता लग गया। घर में बुजुर्ग पिता के संग बीमार मां ही मौजूद थीं।
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इंश्योरेंस कंपनी में सर्वेयर रहे पिता एसके शुक्ला ने मौजूद लोगों से कहा कि उन्हें बेटे की शहादत पर गर्व है। वह तो बचपन से बहादुर थे और आज इसका सबसे बड़ा उदाहरण सबके सामने रखकर चले गए। उन्होंने बताया कि संकल्प की पत्नी पटना के दानापुर में रहती हैं और वहीं से कश्मीर के लिए रवाना हो गईं हैं।

दोनों बेटियों को जांबाज बनाना चाहते थे संकल्प

shaheed sankalp promised his mother to return home

ले. कर्नल संकल्प कुमार रांची के आर्मी स्कूल से पढ़े थे। मिलनसार स्वभाव के कारण शहर में उनकी अच्छी दोस्त मंडली है। वे अपने पिता के इकलौते बेटे थे। उनके एक नजदीकी ने बताया कि संकल्प की दो बेटियां हैं जिनको बेटों की तरह बहादुर बनाने की उनकी तमन्ना थी।

संकल्प इतने बहादुर थे कि करीब 11 साल पहले (2003) कश्मीर घाटी में तैनाती के दौरान मुठभेड़ में उनके पेट में एके-47 की गोली लगी थी। जानकार बताते हैं कि उनका करीब दो माह तक इलाज चला था जिसमें पेट में तीन दर्जन टांके भी लगाने पड़े थे।

तब ऐसा लगने लगा था कि फील्ड में शायद ही उनको तैनाती मिले। लेकिन, संकल्प ने खुद अफसरों को पत्र लिखकर फील्ड में तैनाती मांगी और आतंकियों से लड़ते हुए सर्वोïच्च बलिदान दिया।

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