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शाह के एक फैसले से भाजपा नेताओं में बेचैनी

Thu, 16 Jul 2015 10:42 AM IST
एम संजय/ अमर उजाला, नई दिल्ली।
एम संजय/ अमर उजाला, नई दिल्ली। Updated Thu, 16 Jul 2015 10:42 AM IST
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Shah 's decision upset the party's youth

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के फैसले से उनकी टीम में शमिल नेता ही ठगा महसूस कर रहे हैं। विभाग में शामिल किए जाने से उनकी पहचान पर संकट बन आय है।

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पार्टी संविधान में मोर्चा और प्रकोष्ठ के गठन का वर्णन तो है। मगर विभाग गठन को लेकर कोई जिक्र नहीं है। संगठन विस्तार की कवायद में भाजपा में विभिन्न प्रकोष्ठों के गठन की व्यवस्था रही है।
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मगर पद की राजनीति करने वाले नेताओं पर लगाम कसने के कवायद में शाह ने प्रकोष्ठ गठन करने के बजाए हाल ही में 18 विभागों का गठन किया है।

ठगा महसूस कर रहे हैं नेता

Shah 's decision upset the party's youth

जिसके बाद से बाद से इन विभागों में जगह पाने वाले नेता शाह के फैसले से ठगा महसूस कर रहे हैं। शाह के फैसले पर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं कि टीम में अहम पद पाने वाले महासचिव अरूण सिंह, सिदार्थ नाथ सिंह, नलिन कोहली, गोपाल कृष्ण अग्रवाल और बाला सुब्रमण्यम सरीखे आधा दर्जन से ज्यादा नेता प्रकोष्ठ के जरिए ही अपनी सियासी पहचान बना सके हैं।

टीम शाह में महासचिव का पद पाने वाले अरूण सिंह ने अपनी राष्ट्रीय स्तर पर सियासत निवेशक प्रकोष्ठ के जरिए शुरू की थी। तो सचिव श्रीकांत शर्मा, सिदार्थ नाथ सिंह और प्रवक्ता नलिन कोहली की पहचान मीडिया प्रकोष्ठ के जरिए बनी है।

हाल ही में प्रवक्ता बनाए गए कृष्ण गोपाल अग्रवाल ने पार्टी के सीए प्रकोष्ठ से अपनी सियासी पारी शुरू की थी। तो संसदीय कार्यालय सचिव का दायित्व निभा रहे बाला सुब्रमण्यम की राजनीतिक चमक प्रकोष्ठ के जरिए बनी है।

संवैधानिक स्थिति नहीं है स्पष्ट

Shah 's decision upset the party's youth

मगर शाह ने प्रकोष्ठ गठन के बजाय विभाग बनाकर नेताओं को भविष्य चमकाने के अवसर से महरूम कर दिया है। जिससे तमाम युवा नेताओं में शाह के इस फैसले के खिलाफ बेचैनी है।

प्रकोष्ठ के बजाय विभिन्न विषयों पर बने विभाग में शामिल किए गए नेताओं का कहना है कि वे राष्ट्रीय स्तर पर टीम शाह के सदस्य तो बन गए हैं। लेकिन उनकी संवैधानिक स्थिति स्पष्ट नहीं है।

जिसके कारण वे पार्टी अधिकारों से भी वंचित हैं। बताया जा रहा है कि विभागों से जुड़े कुछ नेता संगठन महामंत्री रामलाल से मुलाकात कर उनसे अपनी वेदना जताने की योजना बना रहे हैं।

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प्रकोष्ठ के बजाय विभाग बनाए जाने से बढ़ी युवा नेताओं में बेचैनी

Shah 's decision upset the party's youth

शाह के जरिए बनाए गए एक विभाग की अहम जिम्मेदारी पाए नेता का कहना है कि प्रकोष्ठ संयोजक और सहसंयोजक के नाते उन सरीखे नेताओं को पार्टी के राष्ट्रीय परिषद की बैठक में शामिल होने का मौका मिलता था।

पार्टी व्यवस्था के मुताबिक प्रकोष्ठ के संयोजक और सहसंयोजक भी परिषद बैठक के लिए आमंत्रित होते थे। मगर विभागों को लेकर अभी कोई स्थिति स्पष्ट नहीं है। उक्त नेता का कहना है कि प्रकोष्ठ के पदों की एक पहचान होती थी।

लेकिन शाह के जरिए हाल ही में बनाए गए 18 विभागों में से महज एक ट्रेनिंग विभाग में मुरली धर राव को प्रभारी, महेश शर्मा को संयोजक और सुनील पांडे को सह संयोजक बनाया गया है। शेष 17 विभागों में किसी को कोई पद नहीं दिया गया है।

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