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डेथ वारंट के बाद कैसे गुजरी शबनम-सलीम की रात

Wed, 27 May 2015 02:41 AM IST
Updated Wed, 27 May 2015 02:41 AM IST
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shabnam saleem first night after death warrant

मां बाप और भाइयों के साथ ही सात माह के भतीजे अर्श की नृशंस हत्या करते वक्त जिस शबनम के हाथ नहीं कांपे वही शबनम अब रहम के लिए गिड़गिड़ा रही है। फांसी का फंदा सिर पर लटकता देख शबनम ने खाना पीना छोड़ दिया है। जिसे अपने सगे भतीजे का गला घोंटने में रत्ती भर दर्द नहीं हुआ वो अब अपने बेटे की खातिर अपने गुनाहों को बख्श देने की दलील दे रही है।

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जेल प्रशासन ने शुक्रवार को शबनम का स्वास्थ्य परीक्षण कराया। डेथ वारंट जारी होने के बाद से शबनम गुमसुम है वो कभी रोती है तो कभी एकदम खामोश हो जाती है। उसके बदलते व्यवहार को लेकर जेल अधिकारी संजीदा हैं। शबनम को लगातार निगरानी में रखा जा रहा है। गुरुवार की पूरी रात वो नहीं सोई, रह रहकर महिला बैरक में उसकी सिसकियां गूंजती रहीं। जेल प्रशासन ने इस दौरान उसके नियमित मेडिकल चेकअप की व्यवस्था की है।
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उधर जेल अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में यह किसी महिला बंदी का डेथ वारंट जारी होने का पहला मामला है। शबनम ने रिवीजन में जाने के बजाए जेल अधिकारियों से कहा है कि वो सीधे महामहिम राष्ट्रपति से क्षमा मांगेगी। जेल प्रशासन ने इस बाबत तैयारियां कर ली हैं। शनिवार को शबनम की दया याचिका राष्ट्रपति को भेज दी जाएगी।
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जेल मैनुअल के मुताबिक प्रदेश में महिला बंदियों को फांसी देने की व्यवस्था केवल मथुरा जिला जेल में है। इसके अलावा प्रदेश की किसी जेल में महिला बंदी को फांसी देने की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में यदि शबनम की दया याचिका खारिज हो जाती है तो उसे मथुरा जिला जेल ट्रांसफर किया जाएगा। यदि उसकी याचिका मंजूर भी हो जामी है तो भी सजायाफ्ता बंदी होने के नाते उसे नारी बंदी निकेतन लखनऊ भेजा जा सकता है।

अखबार में मौत का फरमान पढ़कर सहम गया सलीम

shabnam saleem first night after death warrant

आगरा केंद्रीय कारागार की हाई सिक्योरिटी बैरक में लगभग पांच सालों से बंद सलीम शुक्रवार सुबह करीब आठ बजे अखबार पढ़ते-पढ़ते एक खबर से सन्न रह गया। आंखें खुली की खुली रह गईं। बदन कांपने लगा। बड़ी तेजी से उठा, खिड़की से बाहर देखा, फिर माथे पर हाथ रखकर जमीन पर बैठ गया। काल कोठरी के बाहर खड़े बंदी रक्षक ने पूछा, क्या हुआ सलीम, ऐसा क्या छप गया अखबार में आज..? लड़खड़ाती आवाज में जवाब मिला, मेरी मौत का फरमान है भाई। जज ने मेरा डेथ वारंट जारी कर दिया है। यह कहकर गुमसुम हो गया।

शबनम की मौत का आदेश तो गुरुवार शाम को ही अमरोहा जिला जेल पहुंच गया था, लेकिन सलीम का डेथ वारंट आगरा सेंट्रल जेल में शुक्रवार की रात तक भी नहीं आया। जेल के सूत्रों ने बताया कि सलीम को डेथ वारंट की जानकारी अखबार में खबर पढ़कर हुई। जेलर लाल रत्नाकर सिंह ने बताया कि सलीम का डेथ वारंट अभी उन्हें नहीं मिला है। हालांकि सलीम को अखबार के माध्यम से इसकी जानकारी मिल गई है। सेंट्रल जेल में फांसी की व्यवस्था नहीं है। डेथ वारंट मिलने पर पता चलेगा कि उसे फांसी के लिए किस जेल में भेजना है। डेथ वारंट मिलते ही जेल प्रशासन उसकी दया याचिका राष्ट्रपति के पास भेजेगा।

रोज पूछता है सलीम, कैसे टली थी कोली की फांसी

सलीम को अपनी मौत की आहट सुनाई देने लगी है। जेल के सूत्रों ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट से फांसी की सजा बरकरार रहने के बाद वह ज्यादा बेचैन हुआ है। बंदी रक्षकों से पूछता है कि निठारी कांड के गुनहगार सुरेंद्र कोली की फांसी कैसे टली थी? उसे पता चला है कि दिल्ली की एक संस्था ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस पर आए निर्णय से कोली फांसी पर लटकते लटकते रह गया था। इससे पहले मेरठ जेल में उसे फांसी देने का रिहर्सल भी हो चुकी थी। सलीम बंदी रक्षकों से उस संस्था का मोबाइल नंबर मांगता है। वह कहता है कि उसके भाई-बहन उन लोगों से संपर्क करेंगे।

बता दें, शबनम ने अपने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर 14/15 अप्रैल 2008 की रात अमरोहा के हसनपुर कस्बे से सटे गांव बावनखेड़ी में अपने परिवार के सात लोगों को कुल्हाड़ी से काटकर मौत के घाट उतार दिया था। दोनों को 15 जुलाई 2010 को अमरोहा जिला जज ने सजा ए मौत सुनाई थी। हाईकोर्ट ने मृत्युदंड को कंफर्म किया। सुप्रीम कोर्ट ने भी फांसी की सजा बरकरार रखी। इसके बाद बृहस्पतिवार को दोनों का डेथ वारंट जारी कर दिया गया।

कोर्ट ने जेलर से पूछा, जेल में फांसी घर है?

shabnam saleem first night after death warrant

बावनखेड़ी कांड की खलनायिका शबनम को फांसी पर लटकाए जाने के लिए जिला जज अमरोहा की अदालत से गुरुवार को जारी किए गए शबनम के डेथ वारंट पर कोई तारीख अंकित नहीं थी। लिहाजा सीनियर जेल सुपरिंटेंडेंट ने शुक्रवार को न्यायालय से अनुरोध किया कि उन्हें शबनम की फांसी की तारीख और वक्त बता दिया जाए।

अदालत ने मुरादाबाद जिला जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक को ही इसके लिए प्राधिकृत कर आदेश दिया था कि यथाशीघ्र शबनम को फांसी पर लटकवाकर मृत्यु दंडादेश का निष्पादन कराएं। शुक्रवार को सीनियर जेल सुपरिंटेंडेंट के अनुरोध के जवाब में अमरोहा के जनपद न्यायाधीश ने जेल अधीक्षक से पूछा है कि पहले यह बताएं के आपकी जेल में फांसी देने की व्यवस्था है या नहीं और आपने शबनम को यह बताया कि नहीं कि वो सीधे राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेज सकती है।

अमरोहा के जनपद न्यायाधीश अशोक कुमार पाठक ने गुरुवार को बावनखेड़ी नरसंहार की गुनहगार शबनम और उसके प्रेमी सलीम का डेथ वारंट जारी किया था। शबनम का डेथ वारंट मुरादाबाद जिला जेल जबकि उसके प्रेमी सलीम का डेथ वारंट आगरा सेंट्रल जेल के सीनियर जेल सुपरिंटेंडेंट को भेजा गया था। पांच साल पहले सेशन कोर्ट द्वारा फांसी की सजाए सुनाए जाने के बाद सलीम को मुरादाबाद जेल से आगरा केंद्रीय कारागार ट्रांसफर कर दिया गया था।

मुरादाबाद जिला जेल के वरिष्ठ अधीक्षक के पास गुरुवार देर शाम शबनम का डेथ वारंट पहुंचा था। जिसमें अदालत ने शबनम को फांसी पर लटकाए जाने का हुक्म वरिष्ठ जेल अधीक्षक को दिया था।

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