फेसबुक, ट्विटर, वाट्सएप को टक्कर देगी हिंदी साइट 'शब्द नगरी'!
आईआईटियंस की सोशल नेटवर्किंग साइट और ब्लागिंग वेबसाइट 'शब्द नगरी' अब फेसबुक, ट्विटर और व्हाट्सएप को टक्कर देगी। सोशल साइट बनकर तैयार हो गई है। ऑनलाइन काम भी कर रही है। इसकी औपचारिक लांचिग 24 जनवरी को होगी, फिर हिंदी की सोशल साइट का प्रचार प्रसार किया जाएगा। इससे हिंदी भाषी क्षेत्रों के 65 करोड़ लोगों को जोड़ने की योजना है।
आईआईटी मुंबई से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक और एमटेक करने वाले गीता नगर निवासी अमितेश मिश्रा ने आईआईटी कानपुर का इनक्यूबेशन सेंटर ज्वाइन किया। सिडबी की मदद और डॉ. अनुपम सक्सेना की देखरेख बिजनेस प्लान बनाया।
वर्ष 2007 से हिंदी की सोशल साइट ‘शब्द नगरी’ (http://www.shabdanagari.in/) पर रिसर्च शुरू किया। यह रिसर्च अब पूरा हो गया है।
पूरी तरह हिंदी में बनी है शब्दनगरी
अमितेश मिश्रा का कहना है कि यूपी, बिहार, राजस्थान, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली सहित देश के तमाम राज्यों के 65 करोड़ लोग हिंदी भाषी हैं। इसके बावजूद हिंदी की कोई सोशल साइट नहीं है। जो सोशल साइटें हैं, उनके की-बोर्ड अंग्रेजी में बने हैं। अंग्रेजी में टाइपिंग पर हिंदी लिखा जाता है। हिंदी भाषी क्षेत्रों के पांच फीसदी लोग ही इसका सही इस्तेमाल कर पाते हैं। बाकी लोग टूटी-फूटी अंग्रेजी में काम चलाते हैं।
‘शब्द नगरी’ पूरी तरह से हिंदी में बनी है। इसका इस्तेमाल हिंदी भाषी आसानी से कर सकेंगे। हिंदी के ऑन स्क्रीन की-बोर्ड बनाए गए हैं। जिस तरह गूगल पर अंग्रेजी लिखने पर शब्द या नाम का हिंदी वर्जन आ जाता है, उसी तरह का प्रावधान शब्द नगरी में है। इसका इस्तेमाल किसी भी सोशल साइट की तरह किया जा सकता है। शब्द नगरी की मदद से हिंदी के ब्लाग, वेबसाइट, पेज और एकाउंट बनाए जा सकते हैं।
अमितेश ने कहा कि यह सोशल साइट मेड इन इंडिया का एहसास कराएगी। इसकी तकनीकी, क्वालिटी, परफारमेंस सब कुछ राष्ट्रभाषा पर आधारित है। उन्होंने कहा कि बीटेक के बाद नौकरी नहीं की। इसके पीछे मंशा बिजनेस करने की थी। कोशिश थी कि जॉब डिमांडर न बनूं। जॉब क्रिएटर बनकर समाज और देश के लिए कुछ करूं। अब इस राह पर आगे बढ़ गया हूं। 24 जनवरी को आईआईटी के आउटरिच आडिटोरियम में शब्द नगरी की लांचिंग होगी। लांचिंग के लिए पद्मश्री गिरिराज किशोर को बुलाया गया है। वह हिंदी के जाने-माने विद्वान हैं।
आईआईटी कानपुर इनक्यूबेशन सेंटर इंचार्ज प्रो. बीबी फणी ने बताया कि यह रिसर्च राष्ट्रभाषा का सम्मान बढ़ाएगा। यह पहला मौका है, जब इनक्यूबेशन सेंटर की मदद से हिंदी पर इतना अच्छा रिसर्च किया गया है। जो सोशल साइट बनाई गई है, वह आकर्षक और इस्तेमाल में सरल है। हिंदीभाषी इससे आसानी से जुड़ सकेंगे।