'क्या जज के खिलाफ चलेगा मुकदमा?'
ग्वालियर में कथित रूप से यौन उत्पीड़न की शिकार हुई महिला जज ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से पूछा है कि अगर संबंधित जज के खिलाफ पहली नजर में आरोप सही पाए गए तो क्या उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाया जाएगा?
पूर्व महिला जज ने यौन उत्पीड़न करने वाले जज से न्यायिक और प्रशासनिक कामकाज छीनने की भी मांग की है ताकि निष्पक्ष जांच हो सके।
महिला जज ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ओर से जांच समिति के समक्ष हाजिर होने के नोटिस के जवाब में समिति की सचिव को पत्र लिखकर अपनी आपत्ति व्यक्त की है। पत्र की प्रति सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को भी भेजी गई है।
पूर्व जज ने कहा है कि यौन उत्पीड़न की जांच से पहले दागी को निलंबित करने का प्रावधान है। लेकिन हाईकोर्ट के जज को निलंबित करना संभव नहीं है। इसलिए निष्पक्ष जांच के लिए उसे न्यायिक और प्रशासनिक कामकाज से हटा दिया जाना चाहिए।
'मेरी पहचान किस तरह गुप्त रहेगी'
प्रारंभिक जांच के दौरान गवाहों को पेश किया जाएगा। सभी गवाह अदालत के कर्मचारी हैं और हाईकोर्ट जज के अधीन हैं। इसलिए जज के कार्यरत रहने के दौरान वह निडर होकर बयान नहीं दे सकते।
हाईकोर्ट जज के अलावा उन तीन न्यायाधीशों को भी हटाया जाए जिन्होंने मुझे परेशान किया। पूर्व जज ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से सवाल किया कि उनकी ओर से गठित जांच समिति किस प्रावधान के तहत गठित की गई है।
अगर जांच में पहली नजर में सबूत मिले तो क्या संबंधित जज के खिलाफ आईपीसी की धारा 354, 354ए तथा 509 के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी दी जाएगी। पूर्व महिला जज ने कार्यदिवस के दौरान हाईकोर्ट जज के चैंबर में कार्यवाही पर भी ऐतराज जताया है।
उन्होंने कहा है कि कार्यदिवस के दौरान मेरी पहचान किस तरह गुप्त रहेगी? अपनी 16 वर्षीय बेटी और पति को तलब करने पर भी उन्होंने आपत्ति दर्ज की है।