एक और सरबजीतः 7 साल के बच्चे को पाक ने जासूस बताकर पकड़ा
अमृतसर के सीमावर्ती गांव बेदी छन्ना के सात साल के मासूम नानक सिंह को क्या पता कि खेत की मेड़ के उस पार पैर रखते ही वह भारतीय नागरिक की जगह %इंडियन स्पाई% बन जाएगा।
1984 के नवंबर महीने की एक सुबह अपने पिता के साथ बार्डर के खेत पर काम करते वह ऐसा लापता हुआ कि उसकी पूरी जवानी पाकिस्तान की जेल में गुजर गई। बूढे़ पिता ने बीते 31 साल में दर-दर फरियाद की, लेकिन अपने बेटे को पाक जेल से वापस नहीं ला सके।
अब लाहौर जेल में ही एक हमले में जान गंवाने वाले भारतीय सरबजीत सिंह की बहन दलबीर कौर ने नानक की रिहाई करवाने बीड़ा उठाया है। उन्होंने गृहमंत्री राजनाथ सिंह से उनके निवास पर मिलकर नानक के बूढ़े पिता रतन सिंह और माता प्यारी की फरियाद पहुंचाई।
पिता हटे तो बच्चे को उठा ले गए पाक रेंजर्स
गृहमंत्री ने भरोसा दिलाया है कि नानक की रिहाई के लिए वे खुद तो प्रयास करेंगे ही, विदेश मंत्री तक भी पाक जेल में बंद पंजाबी के परिवार की पीड़ा पहुंचाएंगे।
बुजुर्ग रतन सिंह के मुताबिक उनका खेत अमृतसर की तहसील अजनाला के एकदम पाक सीमा पर स्थित गांव बेदी छन्ना (कोटारजादा) में बीएसएफ एरिया में पड़ता है।
1984 में मासूम नानक भी पिता के साथ खेत पर जानवरों के साथ गया था। पिता खेती का कोई उपकरण लेने घर चले गए और बेटे का ख्याल रखने के लिए पड़ोसी से कह गए।
गलत पहचान पर किया बंद
थोड़ी देर में जब वह लौटे तो बेटा लापता था। काफी देर तलाश के बाद
उन्हें कामयाबी नहीं मिली। करीब 15 साल बाद उन्हें स्थानीय पुलिस के माध्यम
से पता चला कि उनके बेटे को पाक रेंजर्स ले गए हैं और वह लाहौर जेल में
बंद है।
दलबीर कौर ने बताया कि नानक की रिहाई का बीड़ा उन्होंने इसलिए
उठाया है क्योंकि सरबजीत की तरह उसको भी गलत पहचान पर लाहौर की जेल में रखा
गया है।
कोट लखपत जेल के रजिस्टर में उसका नाम भारतीय कैदियों की
लिस्ट में 71 वें नंबर पर कक्कड़ सिंह पुत्र रतन सिंह के रूप में दर्ज है।
दलबीर ने कहा कि नानक की रिहाई के लिए वे पाक पंजाब के सीएम शाहबाज शरीफ से
भी गुहार लगाएंगी।