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स्वच्छता पर गंभीरता से काम करने की जरूरत: सोलंकी
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 30 Oct 2012 07:48 PM IST
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खुले में शौच और शौचालय पर विवादास्पद बयानों को लेकर हमेशा चर्चा में रहने वाले जयराम रमेश ने सोमवार को स्वच्छता एवं पेयजल मंत्रालय का कार्यभार भरत सिंह सोलंकी को सौंप दिया। अभी तक रमेश इस मंत्रालय को स्वतंत्र प्रभार के तहत देख रहे थे। मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालने के बाद सोलंकी ने कहा कि स्वच्छता व पेयजल पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है।
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वे इस मंत्रालय की पुरानी योजनाओं की जानकारी हासिल करने के बाद ही आगे के कार्यक्रम की रूपरेखा तय करेंगे।
इसके पूर्व जयराम ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि स्वच्छता एवं पेयजल पर पिछले एक वर्ष के दौरान जो भी पहल की गई है, उसे आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्वच्छता का मतलब सिर्फ साफ-सफाई नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। खुले में शौच से न सिर्फ गंदगी फैलती है, बल्कि इससे तमाम तरह की बीमारियां भी फैलती हैं। यही स्थिति पेयजल की भी है। शुद्ध पेयजल के अभाव में बोरिंग व नदियों का पानी पीने से भी बीमारियां फैल रही है। इन बीमारियों के शिकार ज्यादातर बच्चे हो रहे हैं।
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पिछले वर्ष जुलाई में हुए मंत्रिमंडल फेरबदल के बाद मुंबई कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुरुदास कामत के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय स्वीकार न किए जाने के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जयराम रमेश को इस मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी थी। उन्होंने खुले में शौच को राष्ट्रीय शर्म करार देते हुए इसके खिलाफ मुहिम छेड़ रखी थी। कुछ महीने पूर्व उन्होंने अभिनेत्री विद्या बालन को मंत्रालय का ब्रांड अंबेसडर भी नियुक्त किया था। स्वच्छता के प्रति ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए पिछले महीने निर्मल भारत यात्रा शुरू की गई, जो अगले महीने 19 नवंबर को समाप्त होगी।
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इसी क्रम में उन्होंने सिर पर मैला ढ़ोने की प्रथा को समाप्त करने के लिए भी अगले महीने मैला मुक्त यात्रा शुरू करने की योजना बनायी है। जिसका भविष्य अब नए मंत्री के हाथ में है। फिलहाल चर्चा है कि हाल ही में शौचालय से ज्यादा मंदिर होने और जिस घर में शौचालय नहीं वहां शादी से इनकार करने की लड़कियों को सीख देने आदि विवादास्पद बयानों के कारण उनसे इस मंत्रालय की जिम्मेदारी वापस ली गई है। इसके पूर्व भी उन्होंने एक बयान में कहा था कि महिलाओं को मोबाइल फोन चाहिए शौचालय नहीं।