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मोदी के गुजरात में अलग सौराष्ट्र के बीज

Sat, 03 Aug 2013 12:06 AM IST
अहमदाबाद/विनोद अग्निहोत्री
अहमदाबाद/विनोद अग्निहोत्री Updated Sat, 03 Aug 2013 12:06 AM IST
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separate saurashtra demand from modi gujarat

गुजरात में भी अलग सौराष्ट्र राज्य की मांग का बीज पड़ गया है। हालांकि यह मांग अभी भ्रूण स्तर पर है, लेकिन तेलंगाना राज्य गठन के यूपीए सरकार के फैसले से इसे हवा, खाद और पानी मिलने की संभावना है।

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सौराष्ट्र राज्य के गठन के लिए राष्ट्रपति को अलग-अलग मांग पत्र भेजे जा रहे हैं। उनकी मांग का आधार शेष गुजरात की तुलना में सौराष्ट्र का लगातार पिछड़ते जाना है।
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पृथक राज्य की मांग करने वालों के मुताबिक 1947 से लेकर 1956 तक सौराष्ट्र-कच्छ पृथक राज्य था। 1956 में इसे मुंबई राज्य से जोड़ दिया गया और 1960 में गुजरात के साथ विलय कर दिया गया।
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saurashtra
इस मांग के समर्थकों का दावा है कि सरदार पटेल ने भी सौराष्ट्र-कच्छ के पृथक अस्तित्व को स्वीकार किया था। इस मुहिम को चला रही सौराष्ट्र संकलन समिति ने पिछले छह महीने से इसे और तेज कर दिया है।

सौराष्ट्र संकलन समिति के प्रमुख पराग चंदूलाल तेजुरा के मुताबिक राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को पत्र भेजने का सिलसिला इस साल दो जुलाई से शुरू हुआ है और अब तक करीब 200 लोग मांग पत्र भेज चुके हैं। समिति ने राष्ट्रपति से मिलने के लिए समय भी मांगा है।

सौराष्ट्र राज्य की मुहिम पराग चंदूलाल तेजुरा और उनके साथी वर्ष 2002 से चला रहे हैं। दो जुलाई 2002 को सौराष्ट्र संकलन समिति गठित की गई।

तेजुरा कहते हैं कि सौराष्ट्र के लोगों की शिकायत राज्य सरकार, केंद्र सरकार, भाजपा, कांग्रेस सबसे है। सौराष्ट्र के पिछड़ेपन के लिए सभी जिम्मेदार हैं।

saurashtra mapअमर उजाला से बातचीत में पराग ने बताया कि इसी साल 2 जुलाई को संगठन के स्थापना दिवस पर राजकोट में पृथक सौराष्ट्र राज्य का संकल्प लेते हुए 50 युवकों का युवा क्रांति दस्ता गठित किया गया है।


14 जुलाई को जूनागढ़ में दूसरे दस्ते का गठन हुआ। फेसबुक पर सौराष्ट्र कच्छ रिटर्न दि स्टेट हुड, धर्मयुद्ध के नाम से समूह बना है, जिसमे 3600 लोग शामिल हैं।

समिति एक बुकलेट भी बांट रही है, जिसमें अलग सौराष्ट्र राज्य के पक्ष में आधार गिनाए गए हैं और उस पत्र का प्रारूप भी है, जिसे राष्ट्रपति को भेजा जा रहा है।

सौराष्ट्र का स्थानीय अखबार काठियावाड़ पोस्ट इस मुद्दे पर बहस चला रहा है। मांग का आधार सौराष्ट्र का पिछड़ापन है।

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