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बड़े मंत्रियों की अकड़ ने कांग्रेस को डुबोया
धीरज कनोजिया/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Sun, 22 Dec 2013 10:21 AM IST
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चार राज्यों में हार के बाद कांग्रेस सरकार और पार्टी में बदलाव के सहारे 2014 के नतीजे बेहतर करने की जुगत चल रही है। मगर हार की प्रमुख वजहों पर अभी भी ध्यान नहीं जा रहा है।
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पार्टी मुख्यालय में जमीनी स्तर के नेता और कार्यकर्ता इस समस्या को समझ रहे हैं लेकिन वे इस हैसियत में नहीं कि इस पर खुलकर बोले और हाईकमान को बता सके कि बड़े नेताओं और मंत्रियों के अकड़पन से पार्टी का कार्यकर्ता टूट गया है। अब भी उसकी अनदेखी लगातार जारी है।
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साथ ही पार्टी में कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि कपिल सिब्बल, पी चिदंबरम और मनीष तिवारी जैसे बड़े मंत्रियों के विवादित बयानों से जनता में कांग्रेस की छवि खराब हुई है। पार्टी को इसका नुकसान चुनावों में उठाना पड़ा है।
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कांग्रेस मुख्यालय में हार के बाद पार्टी की गतिविधियां सुस्त पड़ गई है। पार्टी कोषाध्यक्ष के कमरे में विभिन्न राज्यों से आए फरियादी यह कहते सुने जा सकते हैं कि उनके राज्य का प्रभारी महासचिव और सचिव तो ऑफिस में बैठते ही नहीं और घर जाने पर मिलते नहीं तो वह अपनी बात कहने आखिर कहां जाए।
कई कार्यकर्ताओं ने मोतीलाल वोरा से शिकायत की कि आप के अलावा कांग्रेस मुख्यालय में कोई मिलता ही नहीं। महासचिव मिलते भी है तो कार्यकर्ताओं से ठीक तरीके से मिलते भी नहीं।
कार्यकर्ता जैसे ही अपनी बात शुरू करते हैं तो उन्हें पार्टी सचिव से मिलने की सलाह दी जाती है। कुछ इसी तरह की हालत केंद्रीय मंत्रियों की भी है।
उत्तर प्रदेश के कई कांग्रेसी कार्यकर्ता प्रभारी महासचिव मधुसूदन मिस्त्री से सुनते मिल जाएंगे कि यूपी कोटे के मंत्री तो उनकी सुनते नहीं। क्षेत्र में आते है तो उनसे मिलते नहीं।
जबकि पिछली बार नवंबर 2012 में सूरजकुंड में कांग्रेस की संवाद बैठक में संगठन और सरकार में तालमेल बैठाने के लिए बड़े बड़े रोडमैप बनाए गए थे।
कार्यकर्ताओं तक मंत्रियों की पहुंच बनाने के लिए बाकायदा दिशा निर्देश खींचे गए थे। मगर हालात जस के तस है। मंत्रियों के रवैये को लेकर कांग्रेस के कई नेता नाराज है।
एक नेता ने कहा कि कुछ मंत्री और नेता विपक्ष पर हमला करते समय ऐसे विवादित बयान देते हैं, जिससे पार्टी का बचाव करने के बजाय नुकसान हो जाता है।
सिब्बल, चिदंबरम, जयराम रमेश, दिग्विजय सिंह और मनीष तिवारी के कई बयानों को लेकर पार्टी के अंदर सोच है कि इससे चुनावों में कांग्रेस की खराब छवि बनी है।
कार्यकर्ता ही नहीं बल्कि मंत्रियों और नेताओं के तेवरों का सामना मीडिया को भी करना पड़ रहा है। कपिल सिब्बल, पी चिदंबरम, मनीष तिवारी जैसे मंत्री प्रेस कांफ्रेंस में टेढ़े सवालों के जवाब में भड़क जाते हैं।