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राहुल के खिलाफ बगावती सुर, खेमों में बंटी कांग्रेस

Mon, 28 Sep 2015 09:05 AM IST
Updated Mon, 28 Sep 2015 09:05 AM IST
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Senior leaders working against Rahul due to negligence

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ कांग्रेस के अंदरखाने बगावत तेज हो गई है। कई राज्यों में कांग्रेस के कद्दावर नेता राहुल के काम करने के अंदाज से बेहद नाराज हैं। राहुल राज में कांग्रेस के यह कद्दावर खुद को बौना महसूस कर रहे हैं।

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कांग्रेस उपाध्यक्ष के खिलाफ बढ़ती नाराजगी के चलते कई राज्यों में पार्टी दो फाड़ होने के कगार पर पहुंच गई है। राजस्थान, हरियाणा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, दिल्ली और पंजाब में राहुल फ्लॉप होने के बावजूद अपने कई करीबी युवा नेताओं को पार्टी के बड़े नेताओं के मुकाबले ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं।
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लिहाजा, इन राज्यों के छत्रप नेता अपनी अलग फौज बनाने के लिए मजबूर हो गए हैं। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के खुलकर राहुल के खिलाफ सामने आने के बाद अब कई और सूबो में छत्रप खुद का वजूद बचाने के लिए कांग्रेस हाईकमान के खिलाफ बगावत कर सकते हैं। खास बात यह है कि मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के स्थानीय चुनावों में राहुल के सिपाहसलार फ्लॉप साबित हुए हैं, मगर फिर भी उन पर कांग्रेस उपाध्यक्ष का भरोसा डगमगा नहीं रहा है।
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राजस्थान में कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट को राहुल ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं। नतीजतन, पार्टी के छोटे बड़े निर्णयों में पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश के सबसे बड़े नेता माने जाने वाले अशोक गहलोत को खुलकर नजरअंदाज किया जा रहा है।

गहलोत भी सचिन पायलट की अगुवाई वाली कांग्रेस से अलग हटकर प्रदेश में अपना अलग गुट बनाकर काम कर रहे हैं। लिहाजा, प्रदेश के कार्यकर्त्ता भी गुटों में बंट गए हैं।

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि सूबे में अभी दो कांग्रेस चल रही है। एक पायलट की दूसरी अशोक गहलोत की। जबकि दूसरी तरह प्रदेश के एक और वरिष्ठ नेता और पार्टी राष्ट्रीय महासचिव सीपी जोशी का गुट भले ही ताकतवर न हो लेकिन प्रदेश कांग्रेस में
सक्रिय है।

युवाओं को तवज्जों से परेशान दिग्गज

Senior leaders working against Rahul due to negligence

उधर, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजित जोगी भी कांग्रेस उपाध्यक्ष की अनदेखी से नाराज माने जा रहे हैं। वे भी प्रदेश में अपना अलग गुट बनाकर काम कर रहे हैं।

मध्य प्रदेश में कांग्रेस के कद्दावर कमलनाथ और दिग्विजय सिंह को भी नजरअदांज किया जा रहा है। अभी हाल में बनी प्रदेश कांग्रेस कार्यकारिणी में इन दोनों नेताओं के ज्यादातर समर्थकों का नाम ही सूची से कट गया। यहां प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव पर राहुल का भरोसा कायम है।

हरियाणा में तो प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर पर राहुल की मेहरबानी के खिलाफ पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा ने अपने समर्थकों के माध्यम से सार्वजनिक तौर पर गुस्सा जाहिर कर दिया।

दिल्ली के रामलीला मैदान में तंवर के खिलाफ हुड्डा के समर्थकों की हूटिंग सबसे ज्यादा चर्चा में रही। दिल्ली में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन पर राहुल की मेहरबानी से खफा पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और उनके बेटे संदीप दीक्षित प्रदेश कांग्रेस में अपना अलग गुट चला रहे हैं। पंजाब की गुटबाजी तो सबसे ज्यादा चर्चा में है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने दावा किया है कि अमरिंदर सिंह अगले साल कांग्रेस तोड़कर नई पार्टी बनाने जा रहे हैं। कांग्रेस महासचिव और पंजाब के प्रभारी शकील अहमद कहते हैं कि कांग्रेस बड़ी पार्टी है। लिहाजा, सहमति असहमति होना लाजिमी है। असंतोष के सुर दूसरी पार्टियों में भी है। पार्टी हाईकमान बातचीत के माध्यम से इन मुद्दों को सुलझा लेगा।

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