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पान मसाले और तंबाकू पर रोक लगाने की मांग

Wed, 12 Dec 2012 10:55 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Wed, 12 Dec 2012 10:55 PM IST
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Seeking to ban pan masala and tobacco

सुप्रीम कोर्ट ने गुटखे के अलावा पान मसाला और तंबाकू की बिक्री और उत्पादन पर प्रतिबंध लगाने की मांग पर बुधवार को केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। एक एनजीओ की ओर से दायर आवेदन पर शीर्षस्थ अदालत ने जवाब तलब किया है।

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देश में दिल्ली समेत 14 राज्य सरकारें अभी तक गुटखे पर प्रतिबंध लगा चुकी हैं, पान मसाले और तंबाकू की बिक्री और उत्पादन अभी जारी है। एनजीओ ने इन सभी उत्पादों पर पूरे देश में बैन लगाने की मांग की है।
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जस्टिस जीएस सिंघवी की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष एनजीओ ‘सेंटर फॉर पब्लिक इंट्रेस्ट लिटिगेशन’ की ओर से पेश हुए अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि 14 राज्य सरकारें गुटखे पर प्रतिबंध लगा चुकी हैं, बावजूद इसके कई राज्य सरकारें इस मुद्दे पर सजग नहीं हैं। किसी भी तरह से तंबाकू सेवन व्यक्ति के लिए नुकसानदायक ही है।
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इसलिए अदालत से गुजारिश है कि इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर गौर करे और इन सभी उत्पादों पर देश भर में पूर्णतया प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी करे क्योंकि यह मुद्दा अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों को प्राप्त अधिकार से जुड़ा है। हर नागरिक का अधिकार है कि उसे स्वच्छ वातावरण मिले और खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत इन सभी उत्पादों का बनाया जाना कानून का उल्लंघन है।

पीठ ने अधिवक्ता के तर्क से सहमति जताते हुए केंद्र सरकार सहित अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया और फरवरी में अगली सुनवाई करना तय किया। आवेदन में कहा गया है कि गुटखा बनाने वाली लॉबी बहुत ही सशक्त है, जिसके चलते सरकार भी कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है जबकि खाद्य सुरक्षा कानून के तहत इन उत्पादों को निर्मित करना अधिनियम का उल्लंघन है।

एनजीओ ने गुटखा, पान मसाला और तंबाकू के बनाए जाने, उनकी बिक्री, आयात और निर्यात पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की मांग की है। साथ ही केंद्र सरकार को खाद्य सुरक्षा कानून को लागू कराने के लिए ठोस कदम उठाने का निर्देश जारी करने की मांग की है।

एनजीओ ने आवेदन में कहा है कि अन्य देशों की तुलना में देश में मुख कैंसर बहुत बड़ी समस्या के तौर पर सामने आ रही है। पश्चिमी देशों में मुख कैंसर का प्रतिशत दो से तीन है। जबकि भारत में 25 से 30 प्रतिशत तक मुख कैंसर होता है।

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान काउंसिल के अनुसार वर्ष 1991 में हर दूसरे मिनट में गुटखा और पान मसाला खाने वाले तीन लोगों की मौत इस वजह से हुई। अब निश्चित रूप से यह संख्या बढ़ चुकी होगी। दूसरी ओर केंद्र की ओर से गठित समिति यह स्पष्ट कर चुकी है कि पूरे विश्व में से 86 प्रतिशत मुंह का कैंसर भारत में  होता है और इसके लिए चबाने वाले तंबाकू उत्पाद ज्यादा जिम्मेदार हैं।

'सिगरेट पर कोई प्रतिबंध क्यों नहीं'
गुटखा निर्माताओं ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दलील दी कि सिगरेट पर कोई प्रतिबंध क्यों नहीं लगाया जाता। क्या सिगरेट से लोगों के स्वास्थ्य पर कोई असर नहीं पड़ता है? महज गुटखा, पान मसाला और तंबाकू को ही निशाना क्यों बनाया जा रहा है।


सर्वोच्च अदालत ने हालांकि इस दलील को तूल न देते हुए यह सवाल उठाने वाले गुटखा निर्माता कंपनी की ओर से पेश हुए अधिवक्ता से कहा कि सिगरेट पर प्रतिबंध लगाने की मांग करने से आपको किसने रोका है। आप भी इसके खिलाफ आवेदन कर सकते हैं।

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