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घुसपैठ रोकने को एलओसी पर होगी उच्च क्षमता वाली तारबंदी

Mon, 15 Feb 2016 09:03 AM IST
Updated Mon, 15 Feb 2016 09:03 AM IST
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एलओसी) पर बर्फबारी से क्षतिग्रस्त बाड़ की मरम्मत अप्रैल में शुरू होगी। सेना ने एलओसी पर उच्च क्षमता वाले कंटीले तारों से नए बाड़ बनाने का काम भी उसी समय शुरू करने का निर्णय लिया गया है। कई स्थानों पर आतंकी घुसपैठियों द्वारा बाड़ काटकर भारतीय सीमा में प्रवेश करने की सूचनाओं के बाद अब उच्च क्षमता वाले तारों के इस्तेमाल का निर्णय हुआ है। मनाली स्थित सेना के प्रतिष्ठान को इसकी डिजाइन तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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सेना के सूत्रों के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में एलओसी पर बर्फबारी से कई स्थानों पर तारबंदी को नुकसान की सूचनाएं मिली हैं। इससे पहले बाढ़ और अत्यधिक बारिश ने तारबंदी को नुकसान पहुंचाया था। बारिश और बर्फबारी में भी तारबंदी को सुरक्षित रखने के लिए इस बार सेना ने बेहतर क्वालिटी के कंटीले तारों के इस्तेमाल की योजना बनाई है।
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इस कार्य में लगभग एक हजार करोड़ खर्च हो सकते हैं। जम्मू-कश्मीर में एलओसी पर तारबंदी भारतीय सीमा के अंदर है और अग्रिम चौकियां उससे आगे हैं। लंबी तारबंदी को कई स्थानों पर आतंकियों द्वारा काटे जाने की घटनाएं होती रहती हैं। सूत्रों के मुताबिक नई तारबंदी में अलार्म सिस्टम लगाने पर भी विचार हो रहा है।

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तारबंदी पूरा होने में लगेंगे अभी और दो साल

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एलओसी) पर बर्फबारी से क्षतिग्रस्त बाड़ की मरम्मत अप्रैल में शुरू होगी। सेना ने एलओसी पर उच्च क्षमता वाले कंटीले तारों से नए बाड़ बनाने का काम भी उसी समय शुरू करने का निर्णय लिया गया है। कई स्थानों पर आतंकी घुसपैठियों द्वारा बाड़ काटकर भारतीय सीमा में प्रवेश करने की सूचनाओं के बाद अब उच्च क्षमता वाले तारों के इस्तेमाल का निर्णय हुआ है।

मनाली स्थित सेना के प्रतिष्ठान को इसकी डिजाइन तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सेना के सूत्रों के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में एलओसी पर बर्फबारी से कई स्थानों पर तारबंदी को नुकसान की सूचनाएं मिली हैं। इससे पहले बाढ़ और अत्यधिक बारिश ने तारबंदी को नुकसान पहुंचाया था।

बारिश और बर्फबारी में भी तारबंदी को सुरक्षित रखने के लिए इस बार सेना ने बेहतर क्वालिटी के कंटीले तारों के इस्तेमाल की योजना बनाई है। इस कार्य में लगभग एक हजार करोड़ खर्च हो सकते हैं। जम्मू-कश्मीर में एलओसी पर तारबंदी भारतीय सीमा के अंदर है और अग्रिम चौकियां उससे आगे हैं। लंबी तारबंदी को कई स्थानों पर आतंकियों द्वारा काटे जाने की घटनाएं होती रहती हैं। सूत्रों के मुताबिक नई तारबंदी में अलार्म सिस्टम लगाने पर भी विचार हो रहा है।

केंद्र सरकार ने पाकिस्तान सीमा पर 2,071.42 किमी लंबी तारबंदी को स्वीकृति दी थी। इसमें से 1,986.98 किमी लंबी सीमा पर तारबंदी का काम पूरा हो चुका है। एलओसी पर इसके अलावा तारबंदी है। देश के 17 राज्य अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित हैं। गुजरात से लगने वाली सीमा पर बाड़ लगाने के काम में अभी 36 महीने और लग सकते हैं।

बांग्लादेश सीमा पर 3,326.48 किमी की तारबंदी को मंजूरी मिली जिसमें से 2,708.77 किमी की तारबंदी हो चुकी है। शेष काम मार्च 2019 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। म्यांमार सीमा पर सिर्फ दस किलोमीटर लंबी तारबंदी होनी है। मणिपुर में अबतक चार किलोमीटर तारंबदी ही हुई है। बाद में स्थानीय लोगों के विरोध के कारण यह काम रोक दिया गया।

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