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खुल ही गया पाक जासूस एजाज का काला चिट्ठा

Tue, 02 Feb 2016 04:50 AM IST
Updated Tue, 02 Feb 2016 04:50 AM IST
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secret of pak spy mohammad aizaj

पाक जासूस मोहम्मद इजाज से बरामद गैजेट्स की फोरेंसिक जांच रिपोर्ट आते ही उसका काला चिट्ठा खुलना शुरू हो गया है। एक्सपर्ट टीम ने सोमवार से इस रिपोर्ट का बारीकी से विश्लेषण करना शुरू किया तो कई सनसनीखेज सच सामने आ रहे हैं।

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अफसरों के मुताबिक इस जासूस की उर्दू और पंजाबी भाषा पर अच्छी पकड़ थी। देश की चार सैन्य छावनियों समेत देश से जुड़ीं कई गोपनीय जानकारियां इसने इन्हीं भाषाओं में आईएसआई को भेजी थीं। यह शातिर एजेंट मोबाइल फोन, लैपटॉप और पैन ड्राइव का अधिकांश डाटा डिलीट कर चुका था। जिसका सीबीआई ने बैकअप ले लिया है।
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यह था मामला

27 नवंबर 2015 को एसटीएफ वेस्ट यूपी ने पाकिस्तान निवासी मोहम्मद इजाज को कैंट इलाके से दबोचा था। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से सेना के गोपनीय दस्तावेजों के अलावा गैजेट्स के रूप में मोबाइल फोन, लैपटॉप, पैन ड्राइव और डाटा कार्ड बरामद हुआ था। इन गैजेट्स को फोरेंसिक जांच के लिए नई दिल्ली स्थित सीबीआई एफएसएल भेजा गया था। जिसकी रिपोर्ट हाल ही में मिली है।
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यह है एक्सपर्ट टीम

यह एफएसएल रिपोर्ट सीडी के रूप में मिली है। जिसका एक्सपर्ट कमेटी विश्लेषण कर रही है। इस कमेटी में इस केस के विवेचक के अलावा आर्मी इंटेलीजेंस, एनआईए, एसटीएफ और इंटेलीजेंस के अलावा अन्य खुफिया एजेंसियों के अफसर शामिल हैं। अफसरों के मुताबिक इजाज का काला चिट्ठा जानने में अभी दो दिन का समय और लग सकता है।

यह मिली शुरुआती जानकारी

secret of pak spy mohammad aizaj

अफसरों के अनुसार इजाज आईएसआई को सेना और देश से जुड़ी गोपनीय सूचनाएं भेजते समय ज्यादातर उर्दू और पाक में बोली जाने वाली पंजाबी भाषा का प्रयोग करता था।

इसके मद्देनजर इन भाषाओं के जानकार पुलिसकर्मी भी जांच में लगाए गए। इस जासूस ने मेरठ, बरेली, कोलकाता और दिल्ली की सैन्य छावनियों के अहम दस्तावेजों, फोटो और कई फुटेज के अलावा यमुना एक्सप्रेस वे पर मिराज की लैंडिंग की भी वीडियो भेजी थी।

खास बात यह है कि इन अहम सूचनाओं को भेजने के बाद इनके रिसीव होने की पुष्टि होते ही वह उन्हें अपने मोबाइल फोन या लैपटॉप के अलावा पैन ड्राइव से तुरंत डिलीट कर देता था। यही वजह रही थी कि उसके पकड़े जाने के बाद लोकल इंटेलीजेंस इस डाटा को रिकवर नहीं कर पाया था।

इसके अलावा इजाज से बरामद मोबाइल फोन के डाटा से सामने आया है कि जासूसी के दौरान वह करीब 138 लोगों से संपर्क में था। ये मोबाइल नंबर सेना और इंटेलीजेंस अफसरों के लिए काफी अहम बने हैं। अफसरों का कहना है कि इन नंबरों की पड़ताल करना बेहद जरूरी है।

हालांकि इससे इंकार नहीं कि सभी को संदिग्ध नहीं माना जा सकता। क्योंकि अधिकांश लोगों को जानकारी नहीं होगी कि इजाज आईएसआई एजेंट है। वहीं, माना जा रहा है कि इस मामले में इजाज की पत्नी आसमां से भी दोबारा पूछताछ हो सकती है।

यह बोला था इजाज

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गिरफ्तारी के बाद उससे प्रारंभिक दौर के अलावा रिमांड पर लेकर कड़ी पूछताछ हुई थी। जिसमें इजाज ने कबूला था कि वह भारत में करीब चार साल से रहकर पाकिस्तान के लिए जासूसी कर रहा था। उसने कोलकाता, बरेली, दिल्ली, मेरठ, उत्तराखंड समेत कई राज्यों की गोपनीय जानकारियां पाक भेजना स्वीकार किया था।

एयरबेस को भी आईएसआई के निशाने पर होना बताया था। हालांकि उस समय इजाज ने उतना ही बताया था जितना उससे बरामद दस्तावेजों और गैजेट्स से खुफिया एजेंसियों को पता लगा था। काफी कुछ सच वह छिपाने में कामयाब रहा था। अब इस हालिया जांच रिपोर्ट से देश से जुड़ी गोपनीय जानकारियां इजाज द्वारा पाकिस्तान भेजने की पुष्टि हो गई है।

फोरेंसिक जांच रिपोर्ट का बारीकी से विश्लेषण पूरा होने पर ही कुछ कहा जा सकता है। एक्सपर्ट कमेटी इस काम में लगी है। इसके बाद पाक जासूस से जुड़े लोगों की तलाश भी शुरू की जाएगी।- सुजीत पांडेय, आईजी जोन मेरठ

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