जेटली बोले, रोमांचक होने वाला है आने वाला वक्त
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देश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने में जुटी मोदी सरकार अगले आम बजट में सुधारों के दूसरे दौर का आगाज करने की तैयारी में है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने रविवार को कहा कि 2015-16 के बजट में दूसरी पीढ़ी के कई आर्थिक सुधारों का ऐलान किया जाएगा।
उन्होंने आगे आने वाले समय में और रोमांचक अवसरों का वादा करते हुए कहा कि देश में अभी ज्यादातर क्षेत्रों को और अधिक खोलने की जरूरत है। इसके लिए पूंजी की वाजिब लागत के साथ-साथ नीतियों व कर व्यवस्था में स्थिरता जरूरी है।
साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) अगले हफ्ते होने वाली अपनी मौद्रिक समीक्षा में ब्याज दरों में कटौती करे।
अगले साल पेश होने वाले आम बजट की प्राथमिकता के बारे में वित्त मंत्री ने कहा कि दूसरी पीढ़ी के सुधारों की पूरी सूची तैयार है। साथ ही ऐसे सुधारों की भी पूरी सूची है जो इसलिए पड़ी हुई है क्योंकि पीछे हुई कुछ चीजों को बदलना पड़ा है। इसमें से एक कोल अध्यादेश भी है। बिना विवेक के प्राकृतिक संसाधनों का आवंटन उनका नाश करना ही है। उन्होंने कहा कि एक तर्कसंगत और उचित कर व्यवस्था बनानी है। इसके साथ ही भूमि अधिग्रहण कानून में कुछ प्रक्रियागत बदलाव करने हैं।
मोदी सरकार ने बनाई खास रणनीति
एनडीए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का जिक्र करते हुए जेटली ने कहा कि पिछले 6 माह के दौरान कई कदम उठाए गए हैं, जिससे ठंडा पड़ा उत्साह बढ़ा है। अर्थव्यवस्था की स्थिति के बारे में उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के दौरान अर्थव्यवस्था काफी नीचे चली गई थी और निराशा का भाव फैल गया था, लेकिन बीते छह महीनों के दौरान घरेलू निवेशकों के साथ-साथ विदेशी निवेशकों ने भी काफी रुचि दिखानी शुरू की है।
उन्होंने कहा कि परिणाम दिखने में अभी कुछ समय लगेगा। हालांकि, जमीनी स्तर पर कुछ शुरुआती सुधार के संकेत दिखने लगे हैं। मेरा मानना है कि आने वाला समय हमारे लिए काफी रोमांचक होगा और मुझे लगता है कि भारत में निवेश बढ़ेगा।
जेटली ने हालांकि इस बात को स्वीकार किया कि माहौल को और ठीक करने के लिए और अधिक उपाय करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इसमें न केवल केंद्र के स्तर पर, बल्कि राज्य सरकारों तथा अन्य संस्थाओं की भी भूमिका है, जिसमें संसद में बैठे विपक्षी दल भी शामिल हैं।
वित्त मंत्री से जब यह पूछा गया कि वह कौन से कदम उठाना चाह रहे हैं, तो उनका जवाब था, हमें कई क्षेत्रों को खोलने की जरूरत है जो कि हम कर रहे हैं। इस मामले में हम सही राह पर आगे बढ़ रहे हैं। एक-एक कर और अधिक क्षेत्रों को खोला जाएगा, उनमें संभावनाएं हैं।
उन्होंने कहा, आपको निवेशकों को और बेहतर माहौल देना होगा। आपने उन्हें राजनीतिक स्थिरता दी है, लेकिन उन्हें नीतियों व कर प्रशासन में स्थिरता चाहिए और जो बड़ी गड़बड़ियां हुई हैं, उन्हें ठीक करना होगा।
अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने में जुटी मोदी सरकार
जेटली ने उम्मीद जताई कि सरकार द्वारा किए गए कदमों के प्रभावी होने के बाद 2015-16 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 6 फीसदी के पार हो जाएगी और इसके बाद हम उच्च आर्थिक वृद्धि दर की राह पर चल पड़ेंगे।
सरकार के एजेंडे में ये बिल
जेटली ने कहा कि सुधार साल के 365 दिन होते है लेकिन बजट इन्हें प्रमुखता से सामने लाने का अहम अवसर होता है। कई के एजेंडे में कई क्षेत्र हैं लेकिन अभी तत्काल रूप से इंश्योरेंस संशोधन बिल, कोल अध्यादेश और जीएसटी बिल अहम हैं।
धनी लोगों से वापस ली जाएगी एलपीजी रियायत
जेटली ने एक बार फिर धनी लोगों से घरेलू रसोई गैस सिलेंडरों (एलपीजी) पर मिल रही रियायत वापस लिए जाने का संकेत दिया। हालांकि उन्होंने कहा कि एक बड़े तबके के लिए कुछ न कुछ रियायत देना जारी रखना जरूरी है क्योंकि देश में अब भी बड़ी संख्या में लोग गरीब हैं और उन्हें सरकार की मदद की जरूरत है।
सुधार के 10 कदम
1. इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को मिलेगी रफ्तार
2. गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स लागू करने पर जोर
3. वेतनभोगियों को मिल सकती है आयकर छूट
4. उद्योग को उत्पाद और सीमा शुल्क में राहत की संभावना
5. लोगों की बचत को बढ़ावा देने के लिए होंगे उपाय
6. मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर के लिए बड़े पैकेज की उम्मीद
7. कृषि सेक्टर को और ज्यादा राहत देने की कोशिश
8. कृषि मार्केटिंग सेक्टर को पुराने कानूनों से राहत की आस
9. स्किल डेवलपमेंट के लिए बड़े पैकेज की संभावना
10. सर्विस सेक्टर को रफ्तार देने के लिए और छूट संभव