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SDO ने की खुदकुशी, मार्मिक सुसाइड नोट में छलका दर्द

Wed, 24 Dec 2014 12:01 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर Updated Wed, 24 Dec 2014 12:01 PM IST
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sdo suicide in bulandshahr.

बुलंदशहर नगर कोतवाली के ख्वाजपुर के रहने वाले बिजली विभाग के एसडीओ लोकेंद्र ने सोमवार की रात फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। मंगलवार की सुबह उनका शव कमरे में पंखे से लटका मिला।

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कमरे से सुसाइड नोट मिला है जिसमें लोकेंद्र ने विकलांग होने की वजह से हीन भावना की बात लिखी है। उन्होंने परिवार, दोस्तों और आफिस कर्मियों से माफी मांगी है। लोकेंद्र की तैनाती मुजफ्फरनगर में थी।
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गांव ख्वाजपुर निवासी दरियाब सिंह के बेटे लोकेंद्र (25) करीब चार माह पहले मुजफ्फरनगर के मंडी समिति चतुर्थ मुख्य नगर में उपखंड अधिकारी के पद पर विकलांग कोटे से भर्ती हुए थे।
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परिजनों ने बताया कि सोमवार की देर रात लोकेंद्र मुजफ्फरनगर से गांव आए। परिवार के सभी लोग सो रहे थे। लोकेंद्र चुपचाप ऊपरी मंजिल के अपने कमरे में चले गए। सुबह लोकेंद्र के मोबाइल की घंटी बजने लगी तो छोटा भाई ऊपर पहुंचा। कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था। भाई पतराम ने खिड़की से झांककर देखा तो लोकेंद्र का शव बेड शीट के सहारे पंखे से लटक रहा था।

सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया। कमरे में छह पेज का सुसाइड नोट मिला। सुसाइड नोट में लोकेंद्र ने लिखा है कि विकलांग होने की वजह से मैं सामान्य नहीं हूं। मैं खुद को सामान्य दर्शाने की कोशिश का दोषी मानता हूं। लोकेंद्र ने किसी पर आरोप नहीं लगाया है।

उन्होंने अपने घरवालों से माफी मांगी है। बस अपनी विकलांगता और शरीर की बनावट से हीन भावना की बात लिखी है। नगर कोतवाल राकेश कुमार का कहना है कि सुसाइड नोट से साफ है कि एसडीओ ने आत्महत्या की है।

‘हर किसी की ख्वाहिश पूरी न करने का दर्द झलका’

sdo suicide in bulandshahr.

अपने घर में फंदा लगाकर आत्महत्या करने वाले एसडीओ लोकेंद्र ने सुसाइड नोट में अपने दर्द को साझा किया है। विकलांगता की वजह से खुद को अक्षम मान लोकेंद्र ने परिजनों, दोस्तों की ख्वाहिशें पूरी न कर पाने पर माफी मांगी है। सुसाइड नोट में पांच बार सॉरी लिखने के बाद लोकेंद्र ने लिखा, गुरु से सीखने के लिए शिष्य में सीखने के गुण भी होने चाहिए। मैं लोकेंद्र अपने आपको पूर्ण रूप से विकलांगता और सामान्यता दर्शाने का दोषी मानते हुए इस जीवन से मुक्ति पाता हूं। मैंने यूपीपीसीएल के पीवीवीएनएल में अब तक कार्य करने में कोई भी रुचि नहीं ली। उन्होंने लिखा है कि यहां पर सभी विभागीय कर्मचारी और अधिकारी अच्छे हैं, सभी ने मुझे सम्मान के साथ अच्छा बर्ताव किया। जिसने भी मुझे सम्मान के साथ साहब या सर कहा, आपको मैं लौटा तो नहीं सकता लेकिन हाथ जोड़कर विनती है मुझे माफ कर देना। मुजफ्फरनगर को मेरा आखिरी प्रणाम।

लोकेंद्र ने लिखा है कि लोग कहते हैं कि बेटा मां-बाप का सहारा होता है। लेकिन मैं नहीं। मम्मी-चाचा अब तुम यश, लव के लिए हिम्मत बांधकर जीना आने वाले भविष्य में वो ही तुम्हारे बेटे होंगे। यश, लव तुम्हारा चाचा भी अब तुम्हारे लिए चिज्जी नहीं लाएगा। सूरज तेरा कंप्यूटर नहीं ला सका। बुद्ध पाल तेरी मोटरसाइकिल नहीं ला पाया। गुड्डी तेरी शादी नानक चंद और लाजपत कर देंगे। बबीता व धनवती दीदी आप दोनों घर वालों के सामने ज्यादा मत रोना। प्रीति भाभी आप भी मुझे माफ कर देना आपने मुझे पढ़ने के लिए बहुत सहयोग दिया। अब तुम्हें अपने दोनों बेटों को और बेटी को पढ़ाना होगा। संता भाभी और अनीता भाभी आप दोनों मिलकर प्रीति भाभी और मम्मी-चाचा की हिम्मत बंधाना। महक, जिया तुम खूब पढ़ना और अच्छे घर जाना। कुछ इस तरह लोकेंद्र ने अपने परिजनों की ख्वाहिश पूरी न होने का जिक्र किया है।

पढ़ाई में होशियार थे लोकेंद्र

sdo suicide in bulandshahr.

परिजनों ने बताया कि लोकेंद्र का एक पैर खराब होने के बावजूद पढ़ाई में वे बहुत होशियार थे। उसके मन में कभी भी यह नहीं था कि वह विकलांग है। लेकिन एसडीओ के पद पर तैनात होने के बाद वह हीनभावना का शिकार हो गए थे।

मरने से पहले दोस्त को किया था याद

लोकेंद्र के दोस्त ऋषि ने बताया कि सोमवार रात 11 बजकर 9 मिनट पर लोकेंद्र ने उसके मोबाइल पर कॉल की थी लेकिन फोन साइलेंट पर होने के चलते वह कॉल रिसीव नहीं कर सका। उसे अफसोस है कि यदि वह कॉल उठा लेता तो शायद परेशानी को लेकर बात होती और मेरे समझाने के बाद लोकेंद्र यह कदम न उठाते।

भाई की मौत के बाद सदमे में था लोकेंद्र

लोकेंद्र चार भाइयों में सबसे छोटे थे। बड़े भाई बिजेंद्र की 29 दिसंबर 2013 को शिकारपुर तिराहे पर सड़क हादसे में मौत हो गई थी। उनकी मौत के बाद से लोकेंद्र सदमे में थे। अब लोकेंद्र के घर में उसकी मां और उसके दो भाई हैं।

नगर कोतवाल आरके सिंह ने बताया कि लोकेंद्र मुजफ्फरनगर में विद्युत विभाग में एसडीओ के पद पर तैनात थे। सोमवार रात उन्होंने आत्महत्या कर ली। पुलिस को लोकेंद्र की लाश के पास से  छह पन्नों का सुसाइड नोट मिला है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

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