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वैज्ञानिकों ने विकसित की मुर्गे और मुर्गी की नई किस्म
विजय गुप्ता/नई दिल्ली
Updated Sun, 07 Apr 2013 09:38 PM IST
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गरीब ग्रामीण परिवारों की आय का साधन बढ़ाने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के वैज्ञानिकों ने मुर्गे व मुर्गी की नई प्रजातियों को विकसित करने में सफलता प्राप्त कर ली है।
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वैज्ञानिकों ने नई प्रजाति का नाम ‘श्रीनिधि’ रखा है। आमतौर पर मुर्गे व मुर्गियों के दो से तीन रंग ही होते हैं लेकिन श्रीनिधि का बहुरंगी होना इसकी प्रमुख खासियत है।
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इनके पालन-पोषण का खर्च भी नाममात्र है क्योंकि यह रसोई के बचे-खुचे खाने या बेकार जूठन को खाकर ही पेट भरने में सक्षम है।
आईसीएआर के उप महानिदेशक डॉ. के. एम. एल. पाठक ने बताया कि अब इस नई प्रजाति के मुर्गे व मुर्गी ग्रामीणों के लिए उपलब्ध हैं।
इनके पालन का खर्च न के बराबर है क्योंकि इन्हें खिलाने पर होने वाला खर्च बेहद कम है। साथ ही इन्हें बीमारियों का भी कोई खतरा नहीं है।
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कुक्कुट अनुसंधान निदेशालय के परियोजना निदेशक डॉ. आर. एन. चटर्जी ने बताया कि पूर्ण रुप से विकसित मुर्गा छह रंगों का होता है जबकि मुर्गी का रंग तीन तरह का होता है।
पंद्रह हफ्ते में श्रीनिधि मुर्गे का वजन 2.30 से 2.50 किलो तक हो जाता है। जबकि श्रीनिधि मुर्गी साल भर में 140 से 150 अंडे देती है।
अंडे का वजन 55 ग्राम होता है जबकि जन्म के समय चूजे का वजन 550 से 655 ग्राम तक होता है। चूजे 161 से 170 दिनों में अंडे देने लायक हो जाते हैं।
चटर्जी का कहना है कि ग्रामीण परिवारों के लिए देसी मुर्गों की यह प्रजाति आय बढ़ाने का प्रमुख स्रोत बन सकती है। न सिर्फ चिकन की दृष्टि से बल्कि अंडे के कारोबार के लिए भी यह बेहतर है।
श्रीनिधि को कुक्कुट अनुसंधान परियोजना निदेशालय, हैदराबाद के वैज्ञानिकों ने विकसित किया है। आंध्र प्रदेश के अलावा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु, बिहार, त्रिपुरा और अंडमान-निकोबार आदि राज्यों के गांवों में पालन-पोषण कर इसका परीक्षण भी कर लिया गया है।
-डॉ. के. एम. एल. पाठक, आईसीएआर के उप महानिदेशक
-6 रंगों का होता है पूर्ण रूप से विकसित मुर्गा।
-140-150 अंडे देती है श्रीनिधि मुर्गी साल भर में।
-161-170 दिनों में अंडे देने लायक हो जाते हैं चूजे।
-2.50 किलो तक हो जाता है 15 दिन में श्रीनिधि मुर्गे का वजन।