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गरीब छात्रों से भेदभाव पर दंडित होंगे स्कूल

Fri, 26 Oct 2012 09:28 PM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 26 Oct 2012 09:28 PM IST
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School will penalize poor students discrimination

निजी स्कूलों में आरटीई के तहत प्रवेश पाने वाले गरीब बच्चों के साथ किसी भी तरह का भेदभाव करना अब स्कूल प्रशासन को भारी पड़ेगा। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने इस बारे में दिशानिर्देश जारी करते हुए सभी राज्यों से अनुरोध किया है कि इसका उल्लंघन होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

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आरटीई कानून के तहत आर्थिक व सामाजिक रूप से पिछड़े बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश में 20 फीसदी आरक्षण दिए जाने के बाद कई जगह से ऐसे बच्चों के साथ भेदभाव की शिकायतें मिल रही हैं। ऐसे बच्चों के लिए कुछ स्कूलों में सामान्य बच्चों से अलग कक्षायें चलाई जा रही हैं। यही नहीं क्लास में भी ऐसे बच्चों के सामाजिक व आर्थिक स्थिति को लेकर कई बार छात्र व शिक्षक कमेंट करते रहते हैं। स्कूल में खेलकूद तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों में ऐसे बच्चों के साथ भेदभाव की शिकायतें मिली हैं।
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मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने आरटीई के तहत गरीब तथा सामाजिक रूप से पिछड़े वर्ग से आने वाले बच्चों के साथ ही अनुसूचित जाति/जनजाति के बच्चों के साथ भेदभाव वाले सभी तरह के व्यवहार को वर्जित करने के लिए दिशानिर्देश जारी किया है।
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ऐसे बच्चों के साथ स्कूल में सामान्य बच्चों की ही तरह विभिन्न मामलों में व्यवहार नहीं किए जाने को भेदभाव पूर्ण माना जाएगा। यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी बच्चे द्वारा स्कूल प्रशासन को इस बारे में शिकायत की जाती है तो उसे 60 दिन के अंदर फैसला देना होगा।


मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस दिशानिर्देश को नेशनल कौंसिल फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (एनसीपीसीआर) तथा एससीपीसीआर को भी भेजा गया है। शिकायत मिलने पर बाल अधिकारों के हनन कानून के तहत भी दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों तथा स्थानीय प्रशासन से भी ऐसी शिकायतों पर जरूरी कार्रवाई का अनुरोध किया है।

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