अरुणाचल-असम सीमा विवाद पर सुप्रीम कोर्ट चिंतित
देश की हालात की चिंता भले ही सियासी दलों को न हो। लेकिन भारतीय सीमाओं पर मौजूदा हालात को लेकर सुप्रीम कोर्ट जरूर चिंतित है।
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि भारतीय सीमाओं पर वैसे ही बहुत परेशानियां हैं ऐसे में देश के भीतर सीमा विवाद खड़े कर बंटवारा ना किया जाए। करीब डेढ़ दशक से असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच चल रहे सीमा विवाद पर चिंता जताते हुए न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर और न्यायमूर्ति कूरियन जोसेफ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि पहले से भारत की सीमाओं पर कई दिक्कतें हैं, ऐसे में देश के भीतर बंटवारा न किया जाए।
वास्तव में शीर्ष अदालत इस बात पर बेहद आहत दिखी कि देश के भीतर दो राज्यों के बीच सीमाओं को लेकर वर्षों से विवाद चल रहा है और राज्यों के बीच तनाव चल रहा है। न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर ने यह सवाल भी किया कि इतने समय से यह विवाद चल रहा है, क्या इसका हल न्यायिक प्रक्रिया से निकाला जा सकता है? बुधवार को सुनवाई के दौरान अरुणाचल प्रदेश ने यह बताया कि असम ने सीमा पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया है, जिसे लेकर इलाके में भारी तनाव है।
अरुणाचल प्रदेश सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि स्थिति यह है कि वहां हिंसा होने की आशंका है। इस पर पीठ ने कहा कि अगर इस बात की आशंका है कि असम-अरुणाचल प्रदेश सीमा पर हिंसा हो सकती है तो हम केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश जारी कर सकते हैं कि वहां शांति बनी रहे।
गूगल मैप से लगता है रोज सीमाएं बदल रही
अदालत ने दोनों राज्यों को छह हफ्ते में एडिशनल हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा है। असम सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने पीठ को बताया कि गूगल मैप को देखने से लगता है कि हर दिन सीमा में बदलाव हो रहा है।
गौरतलब है कि अरुणाचल प्रदेश और असम के बीच यह विवाद 1989 से चल रहा है। दोनों के बीच 972 वर्ग किलोमीटर भूभाग को लेकर विवाद है।
गत जुलाई महीने में अरुणाचल प्रदेश ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि असम विवादित भूभाग पर निर्माण कर रहा है, लिहाजा इस पर रोक लगनी चाहिए। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि विवादित क्षेत्र में निर्माण कार्य नहीं किया जाना चाहिए।