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बाल यौन शोषण के खिलाफ बने सख्त कानून: सुप्रीम कोर्ट

Tue, 12 Jan 2016 02:25 PM IST
Updated Tue, 12 Jan 2016 02:25 PM IST
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SC wants harsher penalty for 'atrocious' child rapes in the country

उच्चतम न्यायालय ने बाल यौन शोषण को एक नृशंस और घृणित अपराध करार देते हुए इसके लिए सख्त कानून बनाने की बात कही है। अदालत ने यह भी कहा कि संसद को ऐसे मामलों को संज्ञान में लेते हुए अपराधियों के खिलाफ सख्त कानून बनाने चाहिए जिससे की उनको कड़ी सजा दी जा सके।

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उच्चतम न्यायालय महिला वकील संगठन की ओर से दायर की गई एक याचिका में बाल यौन शोषण के अपराधियों के लिए रासायनिक बधियाकरण जैसी सजा के प्रावधान की मांग की गई। याचिका की सुनवाई कर रही न्यायाधीश दीपक मिश्रा और एनवी रमन की पीठ ने भी ऐसे अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की पैरवी की। हालांकि, अदालत ने केंद्र सरकार को कोई निर्देश देने से इनकार करते हुए कहा कि यह कानून में बदलाव का अधिकार संसद के पास है।
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पीठ ने कहा, 'हम बाल यौन शोषण के मामलों में कड़ी से कड़ी सजा के प्रावधान का सुझाव दे सकते हैं। लेकिन हम किसी विशेष तरह की सजा के लिए सीधा निर्देश नहीं दे सकते। यह संसद के ऊपर है कि वह इस दिशा में कोई निर्णय ले।'
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सुप्रीम कोर्ट ने संसद के पाले में डाली गेंद

SC wants harsher penalty for 'atrocious' child rapes in the country

न्यायालय ने कहा कि भारतीय दंड संहिता में बाल यौन शोषण के लिए कोई विशेष कानून नहीं है। 2 साल से 10 साल के बच्चों और लड़कियों के साथ ऐसी घटनाओं को दूसरी श्रेणी में रखा जाना चाहिए और संसद को ऐसे बाल यौन शोषण के मामलों को ध्यान में रखते हुए नए कानून बनाने चाहिए।

याचिकाकर्ता की ओर वरिष्ठ अधिवक्ता महालक्ष्मी पवनी ने अपनी बात रखते हुए कहा कि हाल के कुछ सालों में बाल यौन शोषण के मामलों में काफी वृद्धि हुई है। 2012 में ऐसे मामलों की संख्या 38,172 थी जो 2014 में बढ़कर 89,423 हो गई। उन्होंने पीठ के सामने मद्रास हाईकोर्ट के उस फैसले को भी रखा जिसमें ऐसे अपराधियों के रासायनिक बधियाकरण की बात कही गई थी।

आपको बता दें कि रासायनिक बधियाकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कामोत्तेजना को कम करने वाली एण्ड्रोजन दवाओं को प्रयोग किया जाता है। इसकी वजह से सेक्स प्रक्रिया, बाध्यकारी यौन कल्पनाओं और यौन क्षमताओं को कम कर दिया जाता है जिसकी वजह से व्यक्ति अपने प्राकृतिक यौन सामर्थ को खो देता है।

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