एनजेएसी पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला संसदीय संप्रभुता पर आघातः सरकार
शीर्ष जजों की नियुक्ति के लिए बने राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) को खारिज करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सरकार चकित है।
शुक्रवार को आए इस फैसले को सरकार ने संसदीय संप्रभुता पर आघात पहुंचाने वाला करार दिया है। हालांकि एटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने साफ किया है कि इस फैसले से न्यायपालिका और सरकार के बीच कोई तकरार नहीं है।
कानून मंत्री सदानंद गौड़ा ने सरकार की ओर से प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों की नियुक्ति में सरकार की भूमिका को खत्म करने का फैसला आश्चर्यजनक है।
गौड़ा ने दलील दी कि सरकार ने एनजेएसी के रुप में लोगों की इच्छा सामने रखी थी। इससे संबंधित बिल को लोकसभा और राज्यसभा की सौ फीसदी सहमति मिली। इसके अलावा नियम के मुताबिक इस बिल को 22 राज्यों के विधानसभा की मंजूरी भी मिली।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से होगी बात
कानून मंत्री ने कहा कि इस मसले पर आगे की नीति तैयार करने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों से बातचीत विचार विमर्श किया जाएगा।
फैसले से असहज केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इस फैसले को संसदीय संप्रभुता पर आघात बताया है। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि पूर्व चीफ जस्टिस वी आर कृष्णाअय्यर और एमएन वेंकटचलैया जैसे दिग्गजों ने कोलेजियम व्यवस्था की खामियों को उजागर किया है।
प्रसाद ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट जजों ने कोलेजियम व्यवस्था की कमियों को दूर करने के लिए राय मांगी है। इससे साफ जाहिर होता है कि इस व्यवस्था में खामी है।
गौरतलब है कि फैसले में एनजेएसी को न्यायिक व्यवस्था का स्वतंत्रता के खिलाफ बताया गया है। हालांकि एटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने इसकी वजह से न्यायपालिका और सरकार के बीच किसी भी तकरार से इनकार किया है।