सहारा मामले में अब 2 फरवरी को होगी सुनवाई
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निवेशकों को पैसे लौटाने के लिए सहारा समूह की दो कंपनियों पर नियंत्रण के लिए सेबी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। गौरतलब है कि करीब 36 हजार करोड़ रुपये निवेशकों को लौटाने हैं।
सेबी चाहता है कि अदालत निवेशकों को पैसा लौटाने के लिए अंतरिम आदेश दे। सेबी के वकील का कहना है कि अदालती आदेश के बावजूद निवेशकों का पैसा लौटाया नहीं गया है। चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सेबी के आग्रह को स्वीकार करते हुए दो फरवरी को सुनवाई करने का निर्णय लिया है।
सेबी की ओर से वरिष्ठ वकील अरविंद दत्तार ने बुधवार को पीठ के समक्ष उल्लेख करते हुए कहा कि समूह की दो कंपनियों पर नियंत्रण के लिए रिसीवर को नियुक्त करने की दरकार है। उनका कहना था कि अदालती आदेश के बावजूद निवेशकों को रकम लौटाए नहीं गए हैं।
सहाराश्री के जेल में होने सौदों में हो रही दिक्कत
उन्होंने कहा कि पिछले तीन महीने से रकम वापस करने की दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई है। उन्होंने पीठ से इस संबंध में अंतरिम आदेश पारित करने की गुहार लगाई। इस पर पीठ ने कहा कि सहारा प्रमुख जेल में हैं इसलिए सौदे में दिक्कत आ रही है।
इससे पहले अदालत ने समूह से जवाब मांगा था कि क्यों नहीं निवेशकों को रकम वापस करने के लिए उसकी संपत्तियों का निपटारा करने के लिए रिसीवर नियुक्त किया जाए। हालांकि सहारा ने कहा था कि एक यूरोपीय कंपनी ने 720 करोड़ रुपये ऋण देने का प्रस्ताव दिया है।
मालूम हो कि चार मार्च 2014 से सुब्रत राय सहारा और समूह के दो निदेशक रविशंकर दुबे और अशोक रॉयचौधरी जेल में हैं। राय की अंतरिम जमानत के लिए अदालत ने 5000 करोड़ रुपये नकद और इतनी ही रकम की बैंक गारंटी के साथ निवेशकों का
पूरे 36000 करोड़ रुपये लौटाने की शर्त रखी है।