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सीवीसी की नियुक्ति मामले में मोदी सरकार की खिंचाई
Updated Fri, 19 Sep 2014 10:40 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) और सतर्कता आयुक्तों के चयन की प्रक्रिया में पारदर्शिता के अभाव के लिए केंद्र सरकार की खिंचाई की।
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हालांकि इसके बाद सरकार ने आश्वासन दिया कि अदालत की सहमति के बगैर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जाएगा। सर्वोच्च अदालत ने सरकार को इस मसले पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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मुख्य सतर्कता आयुक्त और सतर्कता आयुक्तों की चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता के अभाव का सवाल उठाते हुए सर्वोच्च अदालत ने कहा कि इससे पक्षपात और भाई भतीजावाद को बढ़ावा मिलता है।
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अदालत ने जानना चाहा कि इन पदों के लिए सिर्फ नौकरशाहों का ही चयन क्यों होता है, आम आदमी का क्यों नहीं। चीफ जस्टिस आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि चयन प्रक्रिया तो निष्पक्षता की निशानी होनी चाहिए और मौजूदा व्यवस्था की आलोचना हो रही है क्योंकि इसमें पारदर्शिता का अभाव है।
पीठ ने कहा कि कोई भी व्यवस्था, जिसमें चयन के लिए आंतरिक प्रक्रि या अपनाई जाती है, उसकी पारदर्शिता के अभाव के लिए जनता आलोचना करती है। अदालत ने कहा कि देश में प्रतिभा का भंडार है और लोग पारदर्शिता चाहते हैं।
SC ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब
पीठ के समक्ष अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि जनता से आवेदन नहीं आमंत्रित किए जा सकते क्योंकि अधिकांश लोग इस पद के लिए आवेदन करने की बजाय केंद्र सरकार की ओर से विचार करने को प्राथमिकता देते हैं।
अटार्नी ने कहा कि चयन प्रक्रिया पूरी होने में कम से कम एक महीना लगेगा। उन्होंने न्यायालय को भरोसा दिलाया कि इस मामले के शीर्ष अदालत में लंबित होने के दौरान नियुक्ति के बारे में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जाएगा।
शीर्षस्थ अदालत ने अटार्नी जनरल की दलीलें सुनने के बाद केंद्र सरकार को सारे मामले में नौ अक्टूबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए सुनवाई 14 अक्टूबर के लिए स्थगित कर दी।
रोहतगी ने चयन प्रक्रिया के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि कैबिनेट सचिव और 36 अन्य सचिव इस पद के लिए 12 नामों का प्रस्ताव करते हैं। इसमें से 2 नाम लिए जाते हैं और फिर पांच लोगों की सूची तैयार कर इसे चयन समिति के पास भेजा जाता है। पीठ ने इसके बाद नामों को आगे प्रेषित करने के आधार के बारे में पूछा।
गौरतलब है कि सर्वोच्च अदालत में एक गैर सरकारी संगठन की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था। इसमें आरोप लगाया गया है कि सरकार केंद्रीय सतर्कता आयुक्त और सतर्कता आयुक्तों के पदों की रिक्ति के संबंध में प्रचार किए बगैर ही नियुक्ति प्रक्रिया में आगे बढ़ रही है। मुख्य सतर्कता आयुक्त प्रदीप कुमार 28 सितंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
अटार्नी ने कहा कि चयन प्रक्रिया पूरी होने में कम से कम एक महीना लगेगा। उन्होंने न्यायालय को भरोसा दिलाया कि इस मामले के शीर्ष अदालत में लंबित होने के दौरान नियुक्ति के बारे में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जाएगा।
शीर्षस्थ अदालत ने अटार्नी जनरल की दलीलें सुनने के बाद केंद्र सरकार को सारे मामले में नौ अक्टूबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए सुनवाई 14 अक्टूबर के लिए स्थगित कर दी।
रोहतगी ने चयन प्रक्रिया के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि कैबिनेट सचिव और 36 अन्य सचिव इस पद के लिए 12 नामों का प्रस्ताव करते हैं। इसमें से 2 नाम लिए जाते हैं और फिर पांच लोगों की सूची तैयार कर इसे चयन समिति के पास भेजा जाता है। पीठ ने इसके बाद नामों को आगे प्रेषित करने के आधार के बारे में पूछा।
गौरतलब है कि सर्वोच्च अदालत में एक गैर सरकारी संगठन की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था। इसमें आरोप लगाया गया है कि सरकार केंद्रीय सतर्कता आयुक्त और सतर्कता आयुक्तों के पदों की रिक्ति के संबंध में प्रचार किए बगैर ही नियुक्ति प्रक्रिया में आगे बढ़ रही है। मुख्य सतर्कता आयुक्त प्रदीप कुमार 28 सितंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।