फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   SC slam Police department on storing narcotics in police stations

ड्रग्स के ढेर पर क्यों बैठे हैं पुलिस वाले?

Mon, 01 Feb 2016 05:09 PM IST
राकेश भटनागर/ वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी
राकेश भटनागर/ वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी Updated Mon, 01 Feb 2016 05:09 PM IST
विज्ञापन
SC slam Police department on storing narcotics in police stations

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों की संबंधित एजेंसियों से 'ड्रग्स डिस्पोजल कमेटी' बनाने का आदेश दिया है, ताकि नशीले और मादक पदार्थों का निपटारा हो सके। इसमें ब्राउन शुगर से लेकर दर्दनिवारक सिरप, उत्तेजना बढ़ाने वाली गोलियां, अफीम, गांजा और हेरोइन जैसे पदार्थ शामिल हैं।

विज्ञापन


दरअसल ये नशीली दवाएं और मादक पदार्थ देशभर के पुलिस स्टेशनों के अस्थायी स्टोर यानी मालेखानों में जमा हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इन ड्रग्स से होने वाले खतरे पर गौर करते हुए केंद्र और राज्य सरकारों से देशभर में इनके सेवन पर अंकुश लगाने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा है।
विज्ञापन


सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर और न्यायाधीश जस्टिस कुरियन जोसेफ की सदस्यता वाली बेंच ने पिछले सप्ताह अपने फैसले में कहा, ''इसके खतरे की जड़ें केवल इसलिए गहरी नहीं हैं कि ड्रग्स का धंधा करने वालों के पास काफी पैसा है और उनके अंतरराष्ट्रीय लिंक भी हैं, बल्कि इसलिए भी है क्योंकि पुलिस जैसी एजेंसियां और सत्ता में बैठे नेता भी उनकी मदद करते हैं। इस वजह से ड्रग्स की तस्करी का धंधा तेजी से बढ़ रहा है।''

विज्ञापन
विज्ञापन

एमपी हाईकोर्ट के खिलाफ याचिका के दौरान सुनवाई फैसले

SC slam Police department on storing narcotics in police stations

यहां ये जानना जरूरी है कि सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला केंद्र सरकार की ओर से मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के एक फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान आया है। चार साल पहले दायर इस याचिका में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें अदालत ने सबूत के अभाव में मोहनलाल को बरी कर दिया था, जबकि मोहनलाल के पास कथित तौर पर 3.36 किलोग्राम अफीम मिली थी। लेकिन उसे नष्ट करने का कोई सबूत अभियोजन पक्ष पेश नहीं कर सका।

ऐसा कोई सबूत नहीं था जिससे पता चले कि मोहनलाल से बरामद अफीम को आमतौर पर इस्तेमाल में लाने वाली प्रक्रियाओं से नष्ट किया गया था। ऐसे में अफीम को निचली अदालत के सामने पेश किया जाना चाहिए था। अभियोजन पक्ष ऐसा नहीं कर सका। इसलिए ये भी साबित नहीं हो पाया कि वो मोहनलाल से ही बरामद की गई थी।

ऐसे में हाईकोर्ट ने मोहनलाल को बरी कर दिया था। इस मामले में अदालत की मदद कर रहे वकील अजीत कुमार सिन्हा ने न्यायाधीशों को ध्यान इस ओर दिलाया कि ना केवल अफीम, अफीम का चूर्ण, चरस जैसे पारंपरिक नशीले पदार्थ बल्कि आधुनिक नारकोटिक्स ड्रग्स भी नष्ट किए जाने के इंतजार में हैं।

लाखों नशीले टैबलेट नष्ट होने का कर रहे इंतजार

SC slam Police department on storing narcotics in police stations

इसमें बेहोश करने और अन्य नारकोटिक्स से जुड़े 39 लाख टैबलेट शामिल हैं। इसके अलावा 1।10 लाख कैप्सूल, सिरप की 21 हजार बोतलें और 1828 बेहोशी वाले इजेंक्शन शामिल हैं। इसके साथ ही आठ किलोग्राम स्मैक और 84 किलोग्राम गांजा भी मौजूद है। ये सब केवल पंजाब के बठिंडा में मौजूद सामग्री है। दूसरे राज्यों की तस्वीर भी ऐसी ही है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अदालत को बताया है कि पिछले 10 साल में 28,340.047 किलोग्राम प्रतिबंधित ड्रग्स बरामद किए गए हैं। हालांकि मंत्रालय ने यह नहीं बताया है कि इनमें कौन-कौन से पदार्थ शामिल हैं। पुलिस अधिकारियों ने यह भी नहीं बताया है कि किससे कितनी मात्रा में ड्रग्स बरामद किया गया।

ये भी कहा गया है कि बीते दस साल में इनमें से केवल 132.375 किलोग्राम ड्रग्स को ही नष्ट किया गया है। यानी अधिकारियों के पास अभी भी 28207.672 किलोग्राम ड्रग्स मौजूद है। यह देश भर में बरामद कुल ड्रग्स का 99.53 फीसद है।

बरामद ड्रग्स रखने के लिए स्टोर रूम का अभाव

SC slam Police department on storing narcotics in police stations

यह पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों के कब्जे में है, जिनके पास इसे सुरक्षित रखने के लिए स्टोर रूम तक नहीं हैं, जबकि इसे तीन तालों और मजिस्ट्रेट की निगरानी में रखने का प्रावधान है। पंजाब में ड्रग्स तस्करी जोरों पर है। वहां के युवा बड़े पैमाने पर ड्रग्स की चपेट में हैं, क्योंकि उन्हें ये आसानी से मिल जाती है।

बीते दस साल में पंजाब में नौ लाख किलोग्राम अफीम और स्मैक बरामद किया गया है। इनमें से केवल 0.53 फीसद को ही नष्ट किया गया है। राज्य और केंद्र की एजेंसियों की सामूहिक रिपोर्ट के मुताबिक 2002 से 2012 के बीच बरामद ड्रग्स में से केवल 16 फीसद को नष्ट किया जा सका है। बाकी 84 फीसदी ड्रग्स का क्या हुआ, इस पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों ने कहा, ''अगर ये ड्रग्स अब भी पुलिस के मालखाने में हैं तो क्यों नहीं कानूनी प्रक्रियाओं के तहत उसे नष्ट करने के लिए आवेदन किया जा रहा है।''

जाहिर है न्यायाधीश इस मामले में गंभीर खामियों की तरफ इशारा कर रहे हैं। यह पहलू देशभर में बढ़ते ड्रग्स सेवन की एक वजह भी है। यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट ने जब्त ड्रग्स को नष्ट करने के लिए समिति बनाने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने ये भी कहा है, ''ये समिति बिना किसी जांच, परीक्षण और सैंपलिंग के बरामद किए गए ड्रग्स के स्टॉक को जल्द से जल्द नष्ट करने के लिए जरूर कदम उठाए।'' न्यायाधीशों ने ये भी माना कि इसके लिए सैंपलिंग और या प्रमाणपत्र हासिल करने की प्रक्रिया को फिर से संबंधित अधिकारियों की इच्छा पर नहीं छोड़ा जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने तस्करों से बरामद नशीले पदार्थ को क़ानूनन तीन तालों के अंदर रखने के प्रावधान पर पूरी तरह अमल न किए जाने पर भी नाराजगी जताई है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों ने हाईकोर्ट के न्यायाधीशों से कहा है कि उनसे उम्मीद है कि वो मजिस्ट्रेट के कामकाज पर नजर रखेंगे।सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि ड्रग्स की समस्या इसलिए भी फैली है क्योंकि क़ानून लागू करने वाली एजेंसियां दक्षता से काम नहीं कर रही हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed