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बच्चों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया सरकार को नोटिस

Fri, 09 Oct 2015 05:59 PM IST
Updated Fri, 09 Oct 2015 05:59 PM IST
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SC serve notice to Centre and delhi govt over crackers pollution

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए राजधानी में पटाखों पर पाबंदी लगाने को लेकर तीन नौनिहालों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है।

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चीफ जस्टिस एचएल दत्तू की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले में फिलहाल कोई अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार करते हुए नोटिस जारी किया है। साथ ही अदालत ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी नोटिस जारी करते हुए सुनवाई अगले शुक्रवार तक केलिए टाल दी है।
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याचिकाकर्ता शिशुओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि पटाखों से खतरनाक और जहरीला धुआं निकलता है। इस कारण बच्चों को सांस संबंधी परेशानियां हो रही हैं। करीब 40 फीसदी बच्चों को ऐसी परेशानी हो रही है। लिहाजा संबंधित अथॉरिटी को अल्पकालीन और दीर्घकालीन कदम उठाने का निर्देश दिया जाना चाहिए।
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वहीं वरिष्ठ वकील केके वेणुगोपाल ने भी कहा कि दिवाली के बाद आसमान में धुंआ भर जाता है, लिहाजा तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की जरूरत है। पीठ शुरुआत में इस मामले को सामाजिक न्याय पीठ के पास भेजने वाली थी लेकिन बृहस्पतिवार की सुबह सिब्बल द्वारा पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख करने के बाद चीफ जस्टिस सुनवाई के लिए तैयार हो गए।

सिब्बल ने कहा कि हम नहीं चाहते हैं कि सभी बच्चे निंजा (जापान में मध्यकालीन युग में मार्शल आर्ट से निपुण एजेंट जो चेहरे को ढक कर रखते थे) बन जाएं। मालूम हो कि प्रदूषण के एक अन्य मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा था कि दिल्ली में प्रदूषण से बचने के लिए उनका पोता मास्क लगाता है, जिस कारण वह निंजा की तरह दिखता है।

क्या कहा शिशुओं ने अपनी याचिका में

SC serve notice to Centre and delhi govt over crackers pollution

याचिका अर्जुन गोपाल, अरव भंडारी और जोया राव भसीन की ओर से दाखिल की गई है। ये तीन दिल्ली के निवासी हैं और उनकी उम्र छह महीने से 14 महीने के बीच है।

याचिका में कहा गया है कि पिछले दो सालों से दिल्ली को विश्व में सबसे प्रदूषित शहर माना गया है। प्रदूषण केकारण यहां लोगों को तरह-तरह की बीमारियां हो रही है। बड़ी संख्या में लोगों को फेफड़े से संबंधित परेशानी हो रही है।

खासकर बच्चों और किशोरों के लिए यह जानलेवा है। याचिका में कहा गया कि वायु प्रदूषण से संबंधित बीमारियों के कारण हर वर्ष भारत में सात लाख मौत होती है। याचिका में दिल्ली में पटाखों पर प्रतिबंध लगाने की गुहार की गई है।

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