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पत्रकार की संदिग्ध मौत के मामले में केंद्र और यूपी सरकार को नोटिस

Mon, 22 Jun 2015 02:23 PM IST
Updated Mon, 22 Jun 2015 02:23 PM IST
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SC sent notice to central and up govt on journlist murder.

शाहजहांपुर में पत्रकार जगेंद्र की संदिग्ध मौत मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।

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पत्रकार जगेंद्र की मौत मामले की सीबीआई जांच की मांग को लेकर दायर की गई याचिका पर सुनवाई के दौरान सर्वोच्च अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार को नोटिस जारी करके दो हफ्ते जवाब मांगा है। याचिका में पत्रकार के परिवार को सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश देने की भी मांग की गई है।

दरअसल, पत्रकार जगेंद्र के परिजनों ने उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री राममूर्ति सिंह वर्मा पर हत्या का आरोप लगाया है। परिजनों के मुताबिक उनके कहने पर ही पुलिस ने जगेंद्र को जिंदा जलाकर हत्या कर दी।
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'15 दिन में केंद्र और राज्य सरकार से मांगा जवाब'

SC sent notice to central and up govt on journlist murder.

दूसरी ओर पत्रकार जगेंद्र सिंह की मौत के मामले में जगेंद्र का पूरा परिवार हरसंभव लड़ाई लड़ रहा है। सोमवार को जगेंद्र के परिजन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से भी मिलने पहुंचे और उनसे मामले में दखल देने की अपील की।

दूसरी ओर जगेंद्र के परिजन आरोपियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन आमरण अनशन भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि पुलिस और प्रशासन उनकी ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।

परिजनों के मुताबिक प्रशासन के रवैये से साफ है कि सरकार और पुलिस हर हालत में मंत्री राममूर्ति सिंह वर्मा को बचाना चाहती है और परिवार के लोगों को भयभीत कर राजीनामा कराना चाहती है। इसी मुद्दे पर उन्होंने मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी गुहार लगाई है।

एक जून को जगेंद्र की हुई थी संदिग्ध मौत

SC sent notice to central and up govt on journlist murder.

जगेंद्र की मौत का पूरा मामला एक जून को सामने आया। जिसके बाद मुख्य आरोपी मंत्री राममूर्ति वर्मा पर कार्रवाई को लेकर चौतरफा घिरी प्रदेश सरकार ने तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक श्रीप्रकाश राय समेत उन सभी पांच पुलिस कर्मियों को सस्पेंड कर दिया, जो जगेंद्र के घर दबिश देने गए थे। हालांकि मंत्री पर कार्रवाई को लेकर सरकार अब भी मौन है।

मामले में पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह गंभीर प्रकरण है। पुलिस सुबूत जुटा रही है। साक्ष्य मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी। हालांकि उनकी ओर से ये भी कहा जा रहा कि अभी तक इस मामले में मंत्री से कोई पूछताछ नहीं की गई है।

दूसरी ओर परिजन सवाल उठा रहे हैं कि आरोपित राज्यमंत्री राममूर्ति वर्मा पर हाथ डालने से पुलिस बच क्यों रही है। जाहिर है कि कहीं न कहीं दबाव काम कर रहा है।

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