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बाढ़ राहत कार्य पर SC ने केंद्र से मांगी रिपोर्ट

Sat, 13 Sep 2014 08:55 AM IST
Updated Sat, 13 Sep 2014 08:55 AM IST
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SC seeks report from Centre on relief-rescue operations.

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर में बाढ़ से आई आपदा राष्ट्रीय प्रतिक्रिया की हकदार है। साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से कहा कि इस स्थिति से निपटने के लिए बचाव, राहत और पुनर्वास कार्यों के बारे में सोमवार तक अदालत को सूचित किया जाए और इसके लिए एकीकृत एजेंसी गठित करने पर विचार किया जाए।

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अदालत ने केंद्र सरकार और सेना के प्रयासों की सराहना की। लेकिन अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी का यह सुझाव अस्वीकार कर दिया कि न्यायपालिका के लिए अभी इसमें हस्तक्षेप करना और याचिकाओं पर विचार करना उचित नहीं है।
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चीफ जस्टिस आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कहा कि इसे विरोधात्मक मुकदमा नहीं समझा जाए।

पहले भी इस न्यायालय ने उत्तराखंड और दूसरे राज्यों में इतनी व्यापक विनाशलीला के मामलों में हस्तक्षेप किया है। याचिकाओं में घाटी की मौजूदा स्थिति को प्राकृतिक आपदा और राष्ट्रीय आपदा घोषित करने का केंद्र को निर्देश देने की मांग की गई है।
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केंद्र सरकार और सेना की सराहना

SC seeks report from Centre on relief-rescue operations.

पीठ ने अटार्नी जनरल के इस बयान को रिकार्ड पर लिया कि भारत सरकार स्थिति की गंभीरता के प्रति सजग है और प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में एक समिति बचाव व राहत कार्यों को देख रही है। थल सेनाध्यक्ष खुद बचाव कार्य की निगरानी कर रहे हैं।

शीर्षस्थ अदालत ने जम्मू-कश्मीर पैंथर्स पार्टी के मुखिया भीम सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोंसाल्विस और कुछ अन्य याचिकाकर्ताओं के सुझावों को भी स्वीकार किया और कहा कि भारत सरकार बचाव, राहत और पुनर्वास कार्यों के लिए उचित तालमेल की खातिर एकीकृत एजेंसी बनाने पर विचार कर सकती है।

सर्वोच्च अदालत ने इस मामले में पेश होने और न्यायालय की मदद के लिये अटार्नी जनरल को संदेश भेजा था क्योंकि किसी भी याचिकाकर्ता ने याचिका की प्रति केंद्र या जम्मू व कश्मीर सरकार को नहीं दी थी।

पीठ ने कहा कि महज कागज पर आदेश देने का कोई असर नहीं होगा और शीर्ष विधि अधिकारी को सुने बगैर कोई आदेश नहीं दिया जाएगा।

पीठ ने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता राहत कार्यों में सेना के सराहनीय कार्य पर उंगली नहीं उठा रहे हैं। लेकिन उनका कहना है कि इतनी भीषण आपदा के मद्देनजर मौजूदा राहत कार्य एकदम अपर्याप्त हैं। पीठ ने मामले की सुनवाई 15 सितंबर तक स्थगित कर दी है।

हाईकोर्ट को तुरंत शुरू करने की जरूरत

SC seeks report from Centre on relief-rescue operations.

सर्वोच्च अदालत ने राज्य की मौजूदा स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि न्यायपालिका और कार्यपालिका को किसी न किसी रूप में काम शुरू करना चाहिए।

श्रीनगर शहर में ही ऐसी जगह उपलब्ध करानी चाहिए, जहां न्यायपालिका काम शुरू कर सके। हम हाईकोर्ट को श्रीनगर के किसी भी स्थान से, चाहें दो तीन कमरे ही हों, तुरंत शुरू करना चाहते हैं।

चीफ जस्टिस आरएम लोढ़ा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश महेश मित्तल कुमार भी कल तक जम्मू में ही फंसे थे और उनसे टेलीफोन पर बात हुई थी।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोंसाल्विस ने घाटी में बाढ़ से गंभीर रूप से प्रभावित आठ जिलों कुलगाम, अनंतनाग, शोपियां, पुलवामा, गंदरबल, बारामूला, बडगाम और श्रीनगर का जिक्र  करते हुए एक नोट भी दिया।

इस नोट में कहा गया है कि बड़ी संख्या में हेलीकाप्टर, चिकित्सकों, दवाओं, खाद्य पदार्थ, बच्चों के सामान, कंबल, जीवन रक्षक जैकेट, पीने के पानी, तंबू, गर्म कपड़े, जूते, ईंधन और दूसरी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करने की तत्काल आवश्यकता है।

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