फिर संकट में मैगी, सुप्रीम कोर्ट ने दिए जांच के आदेश
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नेस्ले की मैगी नूडल्स पर फिर से जांच के बादल मंडराने लगे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि मैगी के नमूनों की जांच मैसूर की सरकारी प्रयोगशाला में की जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने मैसूर स्थित सरकारी प्रयोगशाला से इस बाबत स्पष्टीकरण देने को कहा कि क्या मैगी नूडल्स में सीसा और ग्लूटामिक एसिड से संबंधित परीक्षण रिपोर्ट कानून के तहत अनुमति मानकों के दायरे में हैं। शीर्ष अदालत ने मैसूर प्रयोगशाला से मिले दो पत्रों का अध्ययन करने के बाद यह आदेश जारी किया।
प्रयोगशाला ने मैगी के नमूनों में मोनोसोडियम ग्लूटामेट (एमएसजी) के बारे में परीक्षण किया था। इस बीच नेस्ले इंडिया ने दावा किया कि मैगी में सीसा तत्व कानून के मुताबिक था जबकि केंद्र ने सभी मानकों के समग्र परिणामों की जरूरत पर बल दिया।
आठ हफ्तों में हो पूरी जांच
न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता और न्यायमूर्ति एनवी रमन की सदस्यता वाली पीठ ने कहा, हमने परीक्षण रिपोर्टों का अध्ययन किया है।
हम चाहेंगे कि केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकीय अनुसंधान संस्थान, मैसूर इस अदालत को दो पहलुओं के बारे में जानकारी दे, कि क्या सीसा और ग्लूटामिक एसिड से जुड़ी टेस्ट रिपोर्ट मानकों के अनुसार है और स्पष्ट किया जाए कि क्या वे खाद्य सुरक्षा कानून के तहत नियत मानकों के दायरे में हैं।
पीठ ने कहा कि अगर संस्थान महसूस करता है कि अतिरिक्त नमूनों की जरूरत है, तो इसके लिए मांग की जा सकती है। अदालत ने मामले को पांच अप्रैल तक स्थगित करते हुए कहा कि सारी प्रक्रिया आठ हफ्तों में की जानी चाहिए। बता दें कि उच्चतम न्यायालय शीर्ष उपभोक्ता आयोग के फैसले के खिलाफ नेस्ले इंडिया लिमिटेड द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा है।