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एसआई भर्ती केस में सुप्रीम कोर्ट ने पूछा यूपी सरकार से सवाल

Wed, 09 Dec 2015 01:29 AM IST
Updated Wed, 09 Dec 2015 01:29 AM IST
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SC seek UP govt to review merit in SI exam case

उत्तर पुस्तिकाओं में वाइटनर का इस्तेमाल करने के कारण उत्तर प्रदेश में सब इस्पेक्टर बनने से महरूम रहे सैकड़ों छात्रों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को उचित प्रस्ताव देने के लिए कहा है।

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गौरतलब है कि उत्तर पुस्तिका में वाइटनर का इस्तेमाल करने के कारण 810 अभ्यर्थियों को मेरिट लिस्ट से हटा दिया गया था। इन छात्रों का कहना है कि परीक्षा में उन्होंने बेहद अच्छा प्रदर्शन किया था लेकिन इक्का-दुक्का उत्तरों में वाइटनर का इस्तेमाल करने के कारण उन जैसे परीक्षार्थियों को पूरी तरह से अयोग्य घोषित कर दिया गया।
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न्यायमूर्ति वी गोपालगौड़ा और न्यायमूर्ति एसए बोबडे की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को इस मसले का उचित समाधान ढूंढ़ने के लिए कहा है। पीठ ने राज्य सरकार से यह भी बताने के लिए कहा है कि जिन उत्तर पर वाइटनर का इस्तेमाल किया गया क्या उन प्रश्नों को हटाने के बाद क्या ये छात्र मेरिट लिस्ट में आने के योग्य हैं?
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साथ ही पीठ ने यह भी पूछा है कि राज्य सरकार में सब इंस्पेक्टर और कांस्टेबल के कितने पद रिक्त हैं।

बड़ी संख्या में सब इंस्पेक्टर के पद रिक्त

SC seek UP govt to review merit in SI exam case

इस मामले में राज्य सरकार भी छात्रों के पक्ष में है। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश एडवोकेट जनरल विजय बहादुर सिंह ने कहा कि राज्य में बड़ी संख्या में सब इंस्पेक्टर के पद रिक्त हैं। उन्होंने कहा कि सब इस्पेक्टर के करीब 10 हजार पद रिक्त हैं।

इन 810 छात्रों का पक्ष लेते हुए उन्होंने कहा कि ये सभी मेधावी छात्र हैं। उनके पास बड़ी-बड़ी डिग्रियां हैं। उन्होंने कहा कि भले ही प्रश्नपत्र में यह निर्देश था कि उत्तर पुस्तिका में वाइटनर का इस्तेमाल वर्जित है लेकिन यह जानकारी सिर्फ पर्यवेक्षकों तक पहुंचाने के लिए थी। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि बाद की परीक्षाओं में इस निर्देश में संशोधन भी हुआ।

वहीं अभ्यर्थियों की ओर से पेश वकीलों ने कहा कि ये मेधावी छात्र हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा कई नहीं लिखा था कि उत्तर पुस्तिका में वाइटनर के इस्तेमाल पर उन्हें अयोग्य करार दे दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन छात्रों ने परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन किया है।

उन्होंने पीठ ने गुहार लगाई कि जिन-जिन उत्तर में छात्रों ने वाइटनर को इस्तेमाल किया गया है, उन प्रश्नों के अंक निकाल दिए जाए और उसके बाद मेरिट लिस्ट तैयार की जाए। हालांकि सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि साफ तौर पर वाइटनर के इस्तेमाल पर पांबदी की बात है। ऐसे में अभ्यर्थियों को वाइटनर का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए था। अगली सुनवाई 12 जनवरी को होगी।

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