मंदिर में मन की शुद्धि ही नहीं सफाई भी जरूरी: SC
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मंदिर में न सिर्फ मन की शुद्धि जरुरी है बल्कि मंदिर व उसकेआसपास साफ-सफाई भी उतना ही आवश्यक है। शीर्ष अदालत ने मंदिर और उसके आसपास गंदगी होने पर नाराजगी जताई है।
शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी तब की जब उसे जानकारी दी गई कि दिल्ली स्थित कालकाजी मंदिर व उसके इर्द-गिर्द साफ-सफाई नहीं है। न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति प्रफुल्ल सी पंत की पीठ ने दक्षिणी दिल्ली नगर निगम(एसडीएमसी) को कालकाजी मंदिर के आसपास साफ-सफाई को लेकर रिपोर्ट देने के लिए कहा है।
पीठ ने एसडीएमसी के आयुक्त को अपने अधिकारियों के साथ कालकाजी मंदिर और उसके इर्द-गिर्द साफ सफाई का जायजा लेने के लिए कहा है। आयुक्त को 10 दिनों के भीतर अदालत में रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा गया है।
वास्तव में कालकाजी मंदिर के मालिकाना हक को लेकर चल रहे विवाद को लेकर हो रही सुनवाई के दौरान कालकाजी मंदिर में सफाई का मुद्दा उठा। पीठ को जानकारी दी गई कि मंदिर में आसपास साफ-सफाई नहीं है और वहां गंदगी फैली रहती है। जिस पर अदालत ने नाराजगी जताई।
साफ सफाई पर कोर्ट ला रही कानून
इसी बीच पीठ को जानकारी दी गई कि कालकाजी मंदिर के प्रबंधन को लेकर सरकार कानून लाने जा रही है। फिलहाल इसकी प्रक्रिया जारी है। इस पर पीठ ने कहा कि चूंकि कानून अभी बना नहीं है इसलिए फिलहाल हम इस पर टिप्पणी कर सकते हैं।
पीठ ने कहा कि मंदिर के मालिकाना हक के मसले पर हम किसी सरकारी एजेंसी को शामिल नहीं करना चाहते। न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा ने कहा कि इस मसले पर हम अपने स्तर पर कमेटी बनाएंगे।
कमेटी में कौन-कौन से लोग होंगे, इस पर बाद में चर्चा होगी। अगली सुनवाई में इन बातों पर चर्चा होगी। न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि फिलहाल हमारी प्राथमिकता कालकाजी मंदिर की साफ-सफाई है।
सुनवाई के दौरान मंदिर के आसपास स्थित दुकानदारों ने पीठ को बताया कि दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद मंदिर प्रबंधन की ओर से उनकी दुकानों के आगे बेरिकेडिंग कर दी गई है। लेकिन पीठ ने फिलहाल इस पर कोई टिप्पणी करने से इनकार किया। वहीं वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने भी अदालत को बताया कि मंदिर के आसपास साफ-सफाई नहीं है।