मुलायम-शिवपाल से सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब
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आपातकालीन निधि से करीब सौ करोड़ रुपये उत्तर प्रदेश के एक कॉलेज को देने के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और उनके भाई शिवपाल यादव द्वारा जवाब दाखिल न करने पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है।
शीर्ष अदालत ने दोनों को चार हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। इटावा स्थित हैबरा डिग्री कॉलेज का संचालन एक सोसायटी करती है और सोसायटी में मुलायम और उनके परिवार के लोग भी शामिल हैं। यह कॉलेज चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से संबद्ध है।
चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्य सरकार से पूछा है कि आखिरकार कंटिंजेंसी फंड से कॉलेज को रकम क्यों दी गई है। पीठ ने पाया कि आठ वर्षों से मुलायम और शिवपाल ने जवाब दाखिल नहीं किया है। इससे नाराज पीठ ने उनके वकील से कहा कि क्या उन्हें अदालती निर्देशों की परवाह नहीं है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट इस कदर नाराज था कि एक वक्त ऐसा भी आया कि दोनों पर दो-दो लाख रुपये जुर्माना लगाने का निर्णय लिया गया। हालांकि, बाद में वकीलों के अनुरोध के बाद पीठ ने जुर्माने के आदेश को वापस ले लिया।
2005 में दाखिल याचिका पर चल रही है सुनवाई
पीठ ने मुलायम और शिवपाल यादव को हलफनामे के जरिए चार हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। साथ ही कॉलेज प्रबंधन और लोक निर्माण विभाग को नोटिस जारी करते हुए पिछले दस सालों का ऑडिट रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
उन्हें यह भी बताने के लिए कहा गया है कि इस दौरान क्या-क्या आपत्तियां जताई गई थीं। शीर्ष अदालत मनेन्द्र नाथ राय की वर्ष 2005 में दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रही है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2004 में उत्तर प्रदेश सरकार ने अवैध तरीके से हैबरा डिग्री कॉलेज को आपातकालीन निधि से सौ करोड़ रुपये दिए गए थे। इस बारे में वर्ष 2008 में सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को जवाब दाखिल करने के लिए कहा था लेकिन अब तक जवाब दाखिल नहीं किया गया। अगली सुनवाई 21 अप्रैल को होगी।