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सांसदों के सम्मान पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

Sat, 02 May 2015 09:30 AM IST
राजीव सिन्हा/अमर उजाला, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 02 May 2015 09:30 AM IST
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SC says anybody can not be allowed to discredit the Parliament or MPs.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि संसद का अपमान देश का अपमान है। शीर्ष अदालत ऐसी किसी भी याचिका में पक्षकार (पार्टी) नहीं हो सकती, जिसमें राजनेताओं को भ्रष्ट और इन हाउस क्रिमिनल बताया गया हो।

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अदालत ने कहा कि हम किसी को जनप्रतिनिधियों को बदनाम करने की इजाजत नहीं दे सकते।

राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही संवैधानिक पीठ ने कहा कि उसे सिर्फ नए कानून एनजेएसी से जुड़े संवैधानिक पहलुओं से मतलब है।
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एनजेएसी की संवैधानिक वैधता को कई व्यक्तियों और संगठनों ने चुनौती दी है। इसी क्रम में संवैधानिक पीठ ने ये टिप्पणी उस वक्त की, जब उसने इस संबंध में वकील एमएल शर्मा द्वारा दाखिल याचिका पर गौर किया।
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पीठ ने याचिकाकर्ता को दिया नोटिस

SC says anybody can not be allowed to discredit the Parliament or MPs.

एमएल शर्मा ने अपनी याचिका में सांसदों और जनप्रतिनिधियों को इन हाउस क्रिमिनल बताया है। साथ ही याचिका में कहा गया था कि भ्रष्ट राजनेता कानून बनाते हैं।

एमएल शर्मा की याचिका को देखने के बाद न्यायमूर्ति जेएस खेहड़ की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ ने कहा कि यह स्वीकार योग्य नहीं है। सांसद कानून बनाते हैं। लिहाजा आप यह नहीं कह सकते कि भ्रष्ट नेता कानून बनाते हैं। यह बहुत गंभीर आरोप है। हम किसी को ऐसा कहने की इजाजत नहीं दे सकते। सांसद हमारे जनप्रतिनिधि होते हैं। उनका सम्मान किया जाना चाहिए।

पीठ ने कहा कि वह उन तमाम कानूनी दलीलों का स्वागत करती है, जो एनजेएसी की संवैधानिक वैधता को लेकर हो। अदालत की सख्त टिप्पणी के बाद एमएल शर्मा ने याचिका में संशोधन करने की इजाजत मांगी लेकिन अदालत ने उनके आग्रह को ठुकरा दिया।

साथ ही अदालत ने शर्मा को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए एक हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है कि क्यों नहीं उनकी जनहित याचिकाओं में पेशी पर रोक लगाई जाए। वहीं अदालत ने सरकार से पूछा है कि जजों की नियुक्तियों में एनजेएसी की सदस्य दो नामचीन हस्तियां किस तरह जवाबदेह होंगी। सरकार मंगलवार को अपना पक्ष संवैधानिक पीठ के समक्ष रखेगी।

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