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'सैनिकों को दुश्मनों से लड़ना चाहिए न कि सरकार से'

Tue, 18 Aug 2015 11:06 PM IST
Updated Tue, 18 Aug 2015 11:06 PM IST
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SC said, Soldier fight should with enemies not to the government

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सैनिकों को दुश्मनों के साथ लड़ाई लड़नी चाहिए न कि सरकार के साथ। शीर्ष अदालत की यह टिप्पणी इस मामले में अहम है क्योंकि पूर्व सैनिकों ने वन रैंक वन पेंशन को लेकर इन दिनों सरकार के खिलाफ झंडा बुलंद कर रखा है।

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न्यायमूर्ति अनिल आर दवे, न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ और न्यायमूर्ति आदर्श गोयल की पीठ ने नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) और पूर्व रक्षा सचिव शशिकांत शर्मा सहित रक्षा और वित्त मंत्रालय के कुछ अन्य अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने से इंकार करते हुए यह टिप्पणी की है। मामला सैन्य अधिकारियों के रैंक पे को लेकर चल रह मुकदमे से संबंधित है।
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पीठ का मानना था कि सरकार के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ना सैनिकों के लिए आखिरी विकल्प होना चाहिए, पहले उन्हें उचित फोरम के समक्ष अपनी परेशानी रखनी चाहिए।

साथ ही पीठ ने कहा कि सरकार को चाहिए कि उनकेआग्रह पर त्वरित कार्रवाई हो। सैनिक जिसके हकदार हैं, उन्हें इसका भुगतान करना चाहिए। सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने भी पीठ को यह भरोसा दिलाया कि सरकार सैनिकों की परेशानी को लेकर गंभीर है।

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क्या हैं रैंक पे का मामला

SC said, Soldier fight should with enemies not to the government

रैंक पे मामले से संबंधित वर्ष 2012 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का क्रियान्वयन न होने पर सेवानिवृत्त रक्षा अधिकारियों के एसोसिएशन ने वरिष्ठ नौकरशाहों को अदालत में घसीटा था।

रैंक पे और पेंशन का भुगतान न होने के कारण एसोसिएशन ने अवमानना याचिका दायर की थी। एसोसिएशन का कहना था कि  नौकरशाहों ने जानबूझ कर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया है, लिहाजा इन अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही की जानी चाहिए।

वर्ष 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को कैप्टन से बिग्रेडियर पद तक के अधिकारियों को जनवरी 1986 से संशोधित वेतनमान सहित रैंक पे देने का आदेश दिया था।

सरकार के जवाब पर नहीं हुई अवमानना मामले पर कार्यवाही
अवमानना याचिका पर सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) ने कहा कि सरकार की ओर से 347 करोड़ रुपये सेना, वायुसेना और नौसेना के कार्यरत 2,840 अधिकारी और 33,814 सेवानिवृत्त अधिकारियों को घोषित बकाये के तौर पर अदा किए गए।

साथ ही तीनों सेना के करीब 20 हजार अधिकारियों को संशोधित पेंशन भी दिया गया। एएसजी के जवाब से संतुष्ट शीर्ष अदालत ने नौकरशाहों के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू करने से इंकार कर दिया।

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