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आखिरी याचिका पर SC की टिप्पणी, 'याकूब को मिला पूरा मौका'

Thu, 30 Jul 2015 06:34 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उलाजा, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उलाजा, नई दिल्ली Updated Thu, 30 Jul 2015 06:34 AM IST
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SC said memon get time for defend himself

1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट्स में सजा-ए-मौत पाने वाले याकूब मेमन को बचाने की कोशिश आखिरी घंटे तक होती रही। रात के 2.30 करीब सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की पीठ ने मेमन की दया याचिका पर अपनी सुनवाई शुरु की।

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भारत के इतिहास में यह ऐसा पहला मौका रहा जब सर्वोच्च न्यायालय ने किसी मामले की देर रात तक की। मेमन की याचिका पर फैसला सुबह 4.50 मिनट पर आया।

इससे पहले वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण, सीनियर एडवोकेट, राजू राम चंद्रन और इंदिरा जय सिंह ने मुख्य न्यायधीश एच.एल दत्तू से मिलने उनके घर पहुंच से थे और उनसे मिलने का समय मांगा था।
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मामले की सुनवाई के दौरान आटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि अगर इसी तरह से दया याचिकाएं बार-बार फाइल की जाती रहेंगी तो डेथ वारंट पर कभी अमल पाया ही नहीं जा सकेगा।
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तीन जजों की बेंच ने की सुनवाई

SC said memon get time for defend himself

मुकुल रोहतगी ने कोर्ट में कहा कि दस घंटे पहले ही डेथ वारंट बरकरार रखने का फैसला लिया गया था, जिसे तीन जजों की ये बेंच खारिज नहीं कर सकती।

रोहतगी ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि याचिकाकर्ता की मंशा फांसी में 4 से 5 साल की देरी करना है और फिर वे इस देरी की वजह से सजा को खत्म करने की मांग करेंगे।

वहीं इस दया याचिका के दौरान मेमन के वकीलों का कहना था कि राष्ट्रपति से अपील खारिज होने के बाद उसे कम से कम 14 दिनों का समय और दिया जाना चाहिए था।

'कानूनन आधे घंटे ही दिए जाते हैं'

SC said memon get time for defend himself

अगर ऐसा नहीं किया जाता तो यह गलत है। सुप्रीम कोर्ट मेमन के वकीलों की इस दलील को पूरी तरह से दरकिनार करते हुए कहा कि राष्ट्रपति द्वारा याचिका खारिज करने के बाद भी 14 दिनों का वक्त देना कानूनी प्रक्रिया का मजाक होता।

मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि हमे नहीं लगता कि इस मामले और आगे समय देना आवश्यक है। मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस दीपक मिश्र ने कहा कि याकूब की रिव्यू पिटीशन पर 10 दिनों तक सुनवाई चली जबकि कानूनन आधे घंटे ही दिए जाते हैं।

मेमन के वकीलों की ओर से दलील दी गई कि उसे राष्ट्रपति के द्वारा खारिज की गई सजा की कॉपी अभी तक मेमन को नहीं मिली है, जिस पर AG मुकुल रोहतगी ने कहा कि पिटीशनर दयायाचिका का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।

'मेरा मुवक्किल मरने वाला है, मुझ पर रहम कीजिए'

SC said memon get time for defend himself

मेमन के वकीलों ने यह भी दलील दी कि मेमन की बेटी उनसे नहीं मिल पाई है। फैसला सुनाते हुए जस्टिस दीपक मिश्र ने कहा कि मेमन को अपने पक्ष में बचाव करने के लिए पूरा समय दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि धमाकों के 22 साल बीत गए हैं, पहले के आदेशों में वारंट में कोई चूक नहीं हुई है। जस्टिस मिश्र ने कहा कि मेमन को नियमों के अनुसार उसके परिवार से मिलने की इजाजत दी जाएगी।

वहीं इस दया याचिका पर फैसले के बाद कोर्ट परिसर से बाहर निकलने पर जब मेमन के वकील युग मोहित चौधरी ने कहा कि मेरा मुवक्किल मरने वाला है, मुझ पर रहम कीजिए।

वहीं दूसरे वकील आनंद ग्रोवर का कहना था कि यह सही फैसला नहीं है। उन्होंने कहा कि मैं इस फैसले से बहुत निराश और दुःखी हूं। सुप्रीम कोर्ट ने दुःखद गलती की है। मेमन के वकीलों का कहना है कि याकूब की मौत गरिमामयी होगी।

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