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मजदूरों के हाथ काटने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

Wed, 16 Jul 2014 06:58 PM IST
Updated Wed, 16 Jul 2014 06:58 PM IST
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sc perturbed over exploitation of migrant labourers

आंध्र प्रदेश में ठेकेदारों द्वारा ओडीशा के प्रवासी मजदूरों के हाथ काटे जाने की दर्दनाक घटना से चिंतित सुप्रीम कोर्ट ने देश में ऐसे लोगों का शोषण और उन पर अत्याचार रोकने के लिए एक नीति तैयार करने पर जोर दिया।

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सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल दिसंबर में इस बारे में मीडिया में आई खबरों का जनवरी में स्वत: ही संज्ञान लेते हुए ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए प्रभावी कदम उठाने पर जोर दिया था।
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अदालत ने कहा था कि कानून लागू करने वाली एजेंसियां ऐसी घटनाओं के प्रति आंख नहीं मूंद सकती हैं। अदालत ने फिलहाल दो राज्यों तक ही अपनी कार्यवाही सीमित रखी है।
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न्यायालय ने कहा कि प्रवासी मजदूरों के बारे में एक नीति होनी चाहिए। ये श्रमिक अनधिकृत ठेकेदारों के चंगुल में नहीं पड़ने चाहिए।

'ऐसा तो प्राचीन काल में भी नहीं होता था'

sc perturbed over exploitation of migrant labourers

जस्टिस तीरथ सिंह ठाकुर की अध्यक्षता वाली बेंच ने इन दो राज्यों को विस्तृत निर्देश देने से पहले दो मजदूरों की हथेलियां काटे जाने पर नाराजगी व्यक्त की।

बेंच ने तल्ख शब्दों में कहा कि हम किस तरह के देश में रह रहे हैं। ऐसा तो प्राचीन काल में भी नहीं होता था। अदालत ने ओडीशा और आंध्र प्रदेश सरकार को इस तरह की घटनाओं की रोकथाम के लिए प्रभावी कदमों की जानकारी देने का निर्देश देते हुये कहा कि यह दिखावटी नहीं होना चाहिए।

कोर्ट ने कहा कि आपको हमें बताना होगा कि प्रवासी श्रमिकों के मामलों में कानून के तहत कितने मामले दर्ज किये गये। अदालत को बताया गया कि पश्चिमी ओडीशा के छह जिलों कोरापुट, बोलंगीर, कालाहांडी, बारागढ़ऩौपार्दा और मल्कानगिरि के गरीबी से जूझ रहे लोग इस तरह के शोषण के शिकार हो रहे हैं। इनमें से अधिकांश पड़ोसी राज्यों आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में ईंट भट्टों पर काम करते हैं।

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