धमाके के दोषी पाक आतंकी गुलाम नबी को उम्रकैद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
20 वर्ष पूर्व जम्मू में गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान हुए धमाके में दोषी करार दिए गए पाकिस्तानी नागरिक एवं हिजबुल मुजाहिद्दीन आतंकी गुलाम नबी को सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस घटना में आठ लोग मारे गए थे।
न्यायमूर्ति एके सिकरी और न्यायमूर्ति यूयू ललित ने पाकिस्तान के निवासी 76 वर्षीय गुलाम नबी को टाडा की धारा-3 और चार, हत्या और आपराधिक षडयंत्र में दोषी ठहराए गए गुलाम नबी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। गत एक जुलाई के आदेश के तहत बुधवार को गुलाम नबी को सुप्रीम कोर्ट में पेश किया गया।
बुधवार को हुई संक्षिप्त सुनवाई के दौरान अमाइकस क्यूरी दुष्यंत पराशर ने नबी की उम्र और बीमारियों का हवाला देते हुए रियायत बरतने की गुहार की। उन्होंने कहा कि पिछले 20 वर्षों से नबी जेल में बंद है।
वहीं सीबीआई ने अदालत से गुहार की कि नबी को तीन अलग-अलग धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया है, लिहाजा तीनों के लिए अलग-अलग उम्रकैद की सजा सुनाई जाए।
साथ ही सजा एक के बाद एक चलाई जाए क्योंकि 14 वर्षों तक जेल में रहने के बाद सरकार को कैदी को रिहा करने का अधिकार है।
धमाके में आठ लोगों की गई थी जान
हालांकि पीठ ने सीबीआई की इस दलील को खारिज कर दिया। पीठ ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने गुलाम नबी को बरी कर दिया था लेकिन हमने इस आदेश को पलट दिया।
पीठ ने कहा कि इकबालिया बयान के अलावा गुलाम नबी के खिलाफ कुछ भी नहीं है। वर्ष 2009 में टाडा कोर्ट ने गुलाम नबी को बरी कर दिया था लेकिन एक जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को दरकिनार कर दिया था। वर्ष 1995 में जम्मू के मौलाना आजाद मेमोरियल स्टेडियम में चल रहे गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान तीन बम धमाके हुए।
उस वक्त स्टेडियम में 40 हजार से अधिक लोग मौजूद थे। धमाकों में तत्कालीन गर्वनर केवी कृष्णाराव बाल-बाल बचे थे। इस घटना में आठ लोगों की मौत हो गई थी और कई घायल हो गए थे। सुप्रीम कोर्ट इस मामले के एक अन्य आरोपी वसीम अहमद को बरी करने के ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराया था।