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SC ने CBI निदेशक को टूजी जांच से हटाया

Fri, 21 Nov 2014 12:31 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला,नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला,नई दिल्ली Updated Fri, 21 Nov 2014 12:31 AM IST
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SC ordered to sinha not interfere in 2G case

देश की शीर्ष जांच एजेंसी सीबीआई के निदेशक रंजीत सिन्हा को तगड़ा झटका लगा है। सर्वोच्च अदालत ने सिन्हा की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए उन्हें टूजी स्पेक्ट्रम मामले की जांच से हटा दिया है।

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साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए सीबीआई के शीर्ष अधिकारी को असहज कर दिया है कि प्रथम दृष्टया आरोप सही लग रहे हैं और ऐसा लग रहा है कि मामले में सब कुछ ठीक नहीं है।
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एनजीओ सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेटशन द्वारा दायर याचिका में रंजीत सिन्हा पर आरोप लगाए गए हैं कि उन्होंने टूजी स्पेक्ट्रम मामले में कुछ आरोपियों को बचाने की कोशिश की है।
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सर्वोच्च अदालत ने बृहस्पतिवार को यह अभूतपूर्व फैसला सुनाते हुए टूजी घोटाले की जांच की जिम्मेदारी सिन्हा के बाद वरिष्ठतम अधिकारी को सौंप दी है। हालांकि जस्टिस एचएल दत्तू, एमबी लोकुर और एके सीकरी की पीठ ने इस संबंध में विस्तृत आदेश पारित नहीं किया।

पीठ ने कहा कि ऐसा करने से देश की शीर्ष जांच एजेंसी की साख पर बट्टा लगेगा। पीठ ने कहा, "आवेदन में जो आरोप लगाए गए हैं, वह प्रथम दृष्टया सही लग रहे हैं।"

हालांकि सिन्हा के वकील ने जोर देकर कहा कि उनके मुवक्किल पर लगे आरोप झूठे हैं। याद रहे कि प्रशांत भूषण ने कुछ हफ्ते पहले सुप्रीम कोर्ट को एक एंट्री रजिस्टर सौंपा था, जिसमें 2जी केस के कुछ आरोपियों के उनके घर आने-जाने का ब्योरा दर्ज था।

भूषण ने आरोप लगाया था कि सीबीआई 2जी घोटाले की जांच कर रही है, ऐसे में सिन्हा का आरोपियों से मिलना संदेह पैदा करता है। सिन्हा का बचाव करने के लिए सीबीआई के संयुक्त निदेशक अशोक तिवारी को भी कोर्ट से फटकार पड़ी।


अपने बॉस का पक्ष ले रहे तिवारी को कोर्ट ने कहा, "आप निदेशक के एजेंट नहीं हैं और आप उनके मुखपत्र नहीं हो सकते। आपको जिम्मेदारी लेने की जरूरत नहीं है।"

याद रहे कि खुद पर लगे आरोपों को चुनौती देते हुए रंजीत सिन्हा ने दस्तावेज मुहैया कराने वाले का नाम सार्वजनिक करने की मांग की थी। हालांकि प्रशांत भूषण ने बृहस्पतिवार को भी इस नाम का खुलासा नहीं किया।

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