सेक्स कांड: CBI और राज्य सरकार को नोटिस

अमर उजाला, दिल्ली Updated Sat, 23 Nov 2013 01:08 AM IST
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कोझीकोड आइसक्रीम पार्लर सेक्स कांड की सीबीआई जांच के लिए केरल के पूर्व मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानंदन की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राज्य सरकार और सीबीआई को नोटिस जारी किया।
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जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली पीठ ने पूर्व मुख्यमंत्री की याचिका पर राज्य सरकार, सीबीआई तथा अन्य प्रतिवादियों से जवाब तलब किया है।
याचिका में कहा गया है कि इस मामले में आपराधिक न्याय को सुनियोजित तरीके से नुकसान पहुंचाया गया, जिसे सिर्फ एक स्वतंत्र जांच का आदेश देकर ही सुधारा जा सकता है।
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पूर्व मुख्यमंत्री की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शेखर नफाडे़ ने कहा कि युवतियों का यौन शोषण किया गया और इस चौंकाने वाली घटना को दबाने के लिए पैसे का लेनदेन हुआ। दुर्भाग्य से केरल हाईकोर्ट ने इस मामले में अनदेखी की।

नफाडे़ ने कहा कि यह हैरतभरा मामला है। यदि इस कांड की सीबीआई से जांच की आवश्यकता नहीं है तो फिर किस किस्म के मामलों की सीबीआई से जांच कराई जाए।

नफाड़े ने कहा कि एक दशक बाद भी जांच आगे नहीं बढ़ सकी है। उन्होंने कहा कि वह इस मामले की चपेट में आए लोगों के नामों का खुली अदालत में खुलासा नहीं करना चाहते, क्योंकि यह संस्था को शर्मसार करने वाला होगा।

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केरल के पूर्व मुख्यमंत्री ने हाईकोर्ट के एक आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने इस मामले की सीबीआई से जांच के लिये पूर्व मुख्यमंत्री की याचिका दो बार, 27 सितंबर, 2011 और फिर इसी साल 30 अगस्त को खारिज कर दी थी। आरोप है कि इस मामले में राज्य के उद्योग मंत्री पीके कुन्हालिकुट्टी भी शामिल हैं।

गौरतलब है कि अत्युताचंदन ने 2011 में कुन्हालिकुट्टी के नजदीकी रिश्तेदार केएस रऊफ के खुलासे के बाद हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि इस मामले की जांच ठीक तरीके से नहीं की गई है। इसलिए मामला सीबीआई को सौंपा जाए। यह कथित सैक्स रैकेट का मामला कोझिकोड में एक आइसक्र क्रीम पार्लर से संबंधित है।

आरोप है कि सैक्स रैकेट चलाने के लिए इस पार्लर का इस्तेमाल किया जाता था। अच्युतानंदन उस समय से ही इस मामले को लेकर आवाज उठा रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने 2006 में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के नेता कुन्हालिकुट्टी को क्लीनचिट देते हुए इसे खारिज भी कर दिया था। कुट्टी इस मामले में कभी भी अभियुक्त नहीं रहे, लेकिन संदेह का साया हमेशा उन पर मंडराता रहा। इस मामले में उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ा था।
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