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कोलेजियम को पारदर्शी बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बनाए दिशानिर्देश

Thu, 17 Dec 2015 03:26 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Thu, 17 Dec 2015 03:26 AM IST
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SC issue guideline for the collegium system

सुप्रीम कोर्ट ने कोलेजियम सिस्टम को और पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए कई दिशानिर्देश जारी किए हैं। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को भारत के प्रधान न्यायाधीश की सलाह पर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट जजों की नियुक्ति के लिए प्रक्रिया ज्ञापन (एमओपी) को अंतिम रूप देने के लिए कहा है।

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न्यायमूर्ति जेएस खेहड़ की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ ने केंद्र सरकार को वांछित योग्याएं, नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता, चयन प्रक्रिया के प्रबंधन के लिए सचिवालय का गठन, नियुक्ति के लिए आए नामों के खिलाफ आई शिकायतों से निपटने के लिए क्रियावली तैयार करने जैसे मुद्दे पर विचार करने के लिए कहा है।
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पीठ ने केंद्र सरकार को भारत के प्रधान न्यायाधीश से परामर्श से एमओपी तैयार के लिए कहा है। प्रधान न्यायाधीश का निर्णय सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जज द्वारा सर्वसम्मति से लिए गए मत के आधार पर होगा। अदालत ने यह आदेश अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी द्वारा यह कहने पर दी है कि प्रधान न्यायाधीश की सलाह कर केंद्र सरकार द्वारा ही एमओपी तैयार की जाती है।
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'न्यायाधीशों के चयन और नियुक्ति में पारदर्शिता सबसे अहम'

SC issue guideline for the collegium system

पीठ ने बताया कि कोलेजियम सिस्टम में सुधार के लिए मांगी गए सुझावों का सार साढ़े 11 हजार पन्नों का है। संवैधानिक पीठ ने कहा कि योग्यता के मापदंड पर विचार करते समय एमओपी को न्यूनतम उम्र और वांछित योग्यता का भी जिक्र करना चाहिए जो कॉलेजियम के दिशानिर्देश के तौर पर काम करेगा और राज्य सरकारों और केंद्र सरकारों को इसका ध्यान रखना चाहिए।

पीठ ने कहा कि न्यायाधीशों के चयन और नियुक्ति में पारदर्शिता सबसे अहम है। नियुक्ति की प्रकिया में पारदर्शिता झलकनी चाहिए और इससे संबंधी हर पहलू कानून मंत्रालय की वेबसाइट, सुप्रीम कोर्ट और संबंधित हाईकोर्ट की वेबसाइट पर होना चाहिए। मालूम हो कि संवैधानिक पीठ ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों की नियुक्ति और स्थानांतरण के लिए केंद्र सरकार द्वारा लाए गए राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) को निरस्त कर दिया था।

जिसके बाद वर्ष 1993 में शुरू हुआ कोलेजियम सिस्टम एक बार फिर से अस्तित्व में आ गया था। हालांकि संवैधानिक पीठ कोलेजियम सिस्टम में सुधार केलिए केंद्र सरकार समेत आम लोगों से सुझाव मांगे थे। सुझावों पर गौर करने केबाद संवैधानिक पीठ ने ये दिशानिर्देश तैयार किए हैं।

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