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डीएनए टेस्ट से हो सकती है बेवफाई की जांच:SC

Thu, 16 Oct 2014 09:17 PM IST
Updated Thu, 16 Oct 2014 09:17 PM IST
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SC: DNA test can be used to prove infidelity.

अगर आपको अपने जीवनसाथी पर शक है। आप उसकी बेवफाई की जांच कराना चाहते हैं तो डीएनए टेस्ट से इसका पता लगा सकते हैं।

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सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अगर किसी को अपने जीवनसाथी की बेवफाई का शक है तो उसकी हकीकत जानने के लिए डीएनए टेस्ट की अनुमति दी जा सकती है।

सर्वोच्च अदालत ने अपने फैसले में साफ कहा कि अगर इस टेस्ट को लेकर दंपत्ति में से कोई भी विरोध करता है तो विरोध करने वाले पर इसका असर पड़ सकता है। फैसला उसके खिलाफ भी जा सकता है।
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न्यायाधीश जेएस खेहर और आरके अग्रवाल की बेंच ने इस मुद्दे पर कोलकाता हाईकोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा जिसमें एक बच्चे के डीएनए टेस्ट का आदेश दिया गया था।
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कोलकाता के एक मामले पर फैसला

SC: DNA test can be used to prove infidelity.

पूरा मामला 6 दिसंबर 2012 का है। जिसमें कोलकाता के रहने वाले याचिकाकर्ता ने पत्नी पर बेवफाई का आरोप लगाते हुए कहा था कि उसके बच्चे का पिता कोई और है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता को लगता है कि उसके लिए अपने आरोपों को साबित करने का एकमात्र जरिया डीएनए टेस्ट है। इसके लिए कोर्ट भी सहमत है।

इसके साथ ही कोर्ट ने कोलकाता हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि ऐसे मामले में पहले भी फैसले आए हैं। जिसमें डीएनए टेस्ट के जरिए सच सामने आया है। इसलिए बच्चे के भविष्य को देखते हुए डीएनए टेस्ट किया जा सकता है।

बता दें कि कोलकाता के रहने वाले रोनोब्रतो रॉय ने अपने पत्नी पर बेवफाई का आरोप लगाते हुए मामले को कोर्ट लेकर गए। उन्होंने में अपनी याचिका में कहा कि उन्हें अपनी पत्नी से तलाक चाहिए।

रोनोब्रतो रॉय ने बताया कि 9 फरवरी 2003 में उनकी शादी दीपनविता से हुई। शादी के बाद उनकी पत्नी कभी उनके साथ नहीं रही। ऐसे में उनके बच्चे के पिता को वो कैसे हो सकते हैं।

इसी को आधार बनाकर उन्होंने कोर्ट में अपील की। जिसमें उन्होंने डीएनए टेस्ट की मांग की। जिससे मामले की सच्चाई सामने आ सके। साथ ही उन्होंने तलाक भी मांगा।

एनडी तिवारी केस में अहम रहा टेस्ट

SC: DNA test can be used to prove infidelity.

इसके बाद कोर्ट ने फैसले में उनकी मांग को स्वीकार कर लिया। कोलकाता हाईकोर्ट के फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी उनकी मांग को स्वीकार करते हुए डीएनए जांच को स्वीकार किया है।

इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एनडी तिवारी के मामले में भी डीएनए टेस्ट ने अहम भूमिका निभाई थी।

इसी टेस्ट के बाद कांग्रेस के वयोवृद्ध नेता नारायण दत्त तिवारी ने रोहित शेखर को अपना बेटा मान लिया। रोहित शेखर तक़रीबन छह साल से एनडी तिवारी को अपना पिता साबित करने के लिए अदालती लड़ाई लड़ रहे थे।

इस केस में भी कोर्ट के आदेश के बाद एनडी तिवारी को अपना डीएनए टेस्ट कराना पड़ा। इसमें यह साबित हुआ कि एनडी तिवारी ही 34 साल के रोहित शेखर के पिता हैं।

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