अरुणाचल मामले में कांग्रेस को सुप्रीम कोर्ट का झटका
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सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल जेपी राजखोवा को नए मुख्यमंत्री को शपथ दिलाने से रोकने संबंधी कांग्रेस की मांग पर कोई अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया।
जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय पीठ ने कांग्रेस नेताओं की राजनीतिक संकट से जूझ रहे राज्य में यथास्थिति बनाए रखने की मांग को भी मानने से इनकार कर दिया। राज्य में अभी राष्ट्रपति शासन लागू है। पीठ ने कहा कि हमने आपकी दलीलें सुन ली हैं। हम इस पर कोई आदेश पारित करने का प्रस्ताव नहीं देंगे।
हम मामले को उसके मेरिट पर सुनेंगे। मामले की जानकारी मिलने के बाद तुरंत अदालत पहुंचे अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि अदालत एक संवैधानिक प्राधिकार को कोई फैसला लेने से नहीं रोक सकती।
अदालत संवैधानिक प्राधिकार के फैसले को रद्द कर सकती है, लेकिन यह दलील पूरी तरह से अतार्किक है। आज नहीं तो कल राज्य से राष्ट्रपति शासन हटाना होगा और कोई न कोई सरकार गठित होगी ही।
अल्पमत में आ गयी थी कांग्रेस सरकार
इससे पूर्व संकट तब शुरू हुआ जब कांग्रेस के 21 विधायकों ने बगावत कर दी, जिसके बाद नाबाम टुकी की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार अल्पमत में आ गई। इन लोगों ने भाजपा के 11 विधायकों के साथ मिल कर नाबाम टुकी सरकार को हटाने का प्रयास किया।
बाद में, कांग्रेस के 14 विधायकों को अयोग्य करार दे दिया गया। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कैबिनेट की सिफारिश को मंजूरी देते हुए राष्ट्रपति शासन की मंजूरी दे दी थी। जिसपर कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अरुणाचल प्रदेश के सीएम नबम तुकी और कांग्रेस के केन्द्रीय नेतृत्व ने भी केन्द्र सरकार की कार्रवाई को पक्षपातपूर्ण बताते हुए इसे राजनीतिक असहिणुता करार दिया था।
वहीं पार्टी प्रवक्ता आनंद शर्मा ने केन्द्र की आलोचना करते हुए इसे जबरन सत्ता हथियाने की चाल बताया था। इसके बाद मामला जब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो कोर्ट ने इसे संविधानपीठ को सौंप दिया।