दिल्ली में फिलहाल बिजली संकट टला
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दिल्ली के नागरिकों के लिए बिजली की आपूर्ति से जुड़ा एक राहत भरा फैसला आया है। सुप्रीम कोर्ट ने एनटीपीसी को निर्देश दिया है कि वह 26 मार्च तक बीएसईएस को बिजली आपूर्ति ना रोके।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में बिजली की आपूर्ति करने वाली कंपनी बीएसईएस को भी आदेश दिया है कि वह दो हफ्ते के भीतर एनटीपीसी को 50 करोड़ रुपए की राशि का भुगतान करे।
बिजली न देने की चेतावनी
बीएसईएस राजधानी और बीएसईएस यमुना पावर ने एनटीपीसी के उस आदेश के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसमें बकाया भुगतान तय वक्त तक न करने पर बिजली न देने की चेतावनी दी गई है।
बीएसईएस ने एनटीपीसी की चेतावनी का विरोध किया और बिजली न देने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
एनटीपीसी ने सोमवार यानी 10 फ़रवरी से बीएसईएस को बिजली न देने की घोषणा की थी। इसके कारण दिल्ली के कई हिस्सों में बिजली संकट पैदा हो सकता था।
विवाद का खामियाजा
बीएसईएस की सहायक कंपनियां शहर की लगभग 70 फीसदी बिजली की आपूर्ति करती हैं।
बीएसईएस की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बीएसईस और एनपीटीसी के बीच चल रहे विवाद का खामियाजा दिल्ली की जनता को उठाना पड़ सकता है।
इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में चल रहे बिजली संकट पर बीच का रास्ता निकाला है।
देश के शीर्ष न्यायालय ने एनटीपीसी को आदेश दिया कि वह 26 मार्च तक बिजली की आपूर्ति जारी रखे और दूसरी तरफ बीएसईएस को दो हफ्ते के भीतर एनटीपीसी को 50 करोड़ रुपए का भुगतान करने को कहा।
मुसीबत में है एनटीपीसी
बीएसईएस राजधानी और बीएसईएस यमुना पावर को एक फरवरी को नोटिस जारी करने के बाद एनटीपीसी ने चार फरवरी को कहा था कि कंपनी अभी मुसीबत में है और जब तक बकाया राशि का भुगतान नहीं हो जाता कंपनी को इन वितरण कंपनियों को बिजली की आपूर्ति बंद करनी पड़ सकती है।
पीटीआई के अनुसार बीएसईएस राजधानी और यमुना पावर को दिसंबर के बिल का भुगतान करना है। इस भुगतान की समय सीमा जनवरी के अंत तक की तय की गई थी।
एनटीपीसी ने दिल्ली की आम आदमी पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार को चिट्ठी लिखकर उनके सामने 262 करोड़ की बकाया सब्सिडी के भुगतान की मांग रखी थी।