IIT मद्रास को अनुसूचित जाति आयोग का नोटिस
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राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) ने अंबेडकर पेरियार स्टडी सर्किल पर प्रतिबंध लगाने पर आईआईटी मद्रास को नोटिस भेजा है।
आयोग के अध्यक्ष पीएल पुनिया ने इस मामले के लिए सीधे केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। वहीं, भाजपा ने इससे इनकार करते हुए कहा है कि छात्र समूह पर प्रतिबंध का फैसला संस्थान के प्रशासन का है।
एनसीएससी अध्यक्ष पीएल पुनिया ने रविवार को बताया कि उन्होंने खुद मामले का संज्ञान लेकर आईआईटी मद्रास से जवाब मांगा है। इस बारे में आगे कार्रवाई की जाएगी।
पुनिया ने कहा कि युवाओं को शैक्षणिक परिसरों में बोलने की आजादी होनी चाहिए। इस तरह के प्रतिबंध लगाना एक तरह से उनकी आवाज दबाना है। यह पूरी तरह से गलत है।
मोदी के दखल की मांग
एनसीएससी अध्यक्ष पीएल पुनिया ने केंद्र सरकार पर कमजोर तबके के प्रति संवेदनहीन होने का आरोप लगाते हुए दावा कि मोदी सरकार बनने के बाद से दलित विरोधी घटनाएं बढ़ गई हैं।
अपनी बात रखने के लिए उन्होंने मई की शुरुआत में राजस्थान के नागौर में हुई घटना का जिक्र किया, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी।
पुनिया ने दलित संगठनों से इस तरह की घटनाओं के खिलाफ आगे आने और एनसीएससी, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तथा राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा ऐसे मामलों को देखे जाने की जरूरत बताई।
दूसरी ओर, भाजपा के राष्ट्रीय सचिव एच राजा ने कहा है कि छात्र समूह पर प्रतिबंध के पीछे उनकी पार्टी नहीं है। उनके अनुसार आईआईटी ने सुविधाओं के दुरुपयोग और नियमों के उल्लंघन पर यह कार्रवाई की है।
डीएमके प्रमुख एम करुणानिधि ने प्रधानमंत्री मोदी से छात्र समूह पर लगे प्रतिबंध के फैसले को बदलने की मांग की है। उनके अनुसार इस घटना की वजह से संस्थान परिसर युद्ध क्षेत्र में बदल गया है।
करुणानिधि ने मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी का नाम लिए बगैर कहा कि इस तरह के मामलों में मोदी के मंत्रियों द्वारा एकतरफा और अधिनायकवादी तरीके से हस्तक्षेप करने से देश की शांति और युवाओं पर सीधा असर पड़ेगा।