परेशान पतियों को राहत देगी ये खबर
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सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में पतियों को बड़ी राहत दी है। ये मामला केस ट्रांसफर से जुड़ा हुआ है।
कोर्ट के मुताबिक पिछले करीब दो दशकों में तलाक के कई मामले कोर्ट में आए हैं। ऐसे मामलों पर गौर करें तो पतियों से पारिवारिक विवाद होने पर महिलाओं को कोर्ट से सहानुभूति मिलती रही है।
कोर्ट अकसर महिलाओं की सुविधा वाली जगहों पर केस को ट्रांसफर करता रहा है। जिसका खामियाजा पतियों को उठाना पड़ता था। उन्हें केस की सुनवाई के लिए उस शहर आना-जाना पड़ता था। जिससे उन्हें परेशानी होती थी।
लेकिन अब ऐसे ही एक मामले में पतियों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने अहम फैसला देते हुए टिप्पणी की है कि आखिर इस तरह के मामले में पतियों को ही खामियाजा क्यों उठाना पड़े।
'केस ट्रांसफर का खामियाजा पतियों को ही क्यों?'
मुख्य न्यायाधीश एचएल दत्तु और न्यायाधीश एके सीकरी की बेंच ने ऐसे ही एक मामले की सुनवाई के दौरान इस ट्रेंड को बदल दिया। कोर्ट के मुताबिक "इस तरह के मामलों में आखिर महिलाओं को सहानुभूति दी जाती है और उनके मुताबिक जगह पर केस ट्रांसफर कर दिया जाता है। जबकि ऐसे अधिकार पतियों के भी पास होते हैं। हमेशा पति ही इस तरह के मामले में पीड़ित क्यों बनें?" कोर्ट ने ये बातें एक पति की अर्जी पर सुनवाई के दौरान कही है।
इतना ही नहीं कोर्ट ने इस मामले में केस ट्रांसफर की अनुमति से इंकार कर दिया। साथ ही संकेत दिए कि अब वे पति की ओर से दायर ऐसे मामलों का अध्ययन के बाद तय करेंगे कि उसे कहीं स्थानांतरित किया जाए या फिर नहीं।
ये पूरा विवाद उस से जुड़ा है जिसमें पति गाजियाबाद का रहने वाला है जबकि महिला मध्य प्रदेश की बैतूल की रहने वाली है। महिला ने केस को बैतूल शिफ्ट कराने की अपील की थी। जिसे कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया।