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'गंगा सफाई की योजनाओं को कैसे लागू करेगा केंद्र?'

Thu, 25 Sep 2014 01:14 PM IST
Updated Thu, 25 Sep 2014 01:14 PM IST
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Ganga Cleaning Action Plan - Supreme Court ask Central Government to Share plan of Action

सुप्रीम कोर्ट ने गंगा सफाई के मसले पर केंद्र से पूछा है कि आखिर वह किस तरह से नदी को पवित्र करने की योजनाओं को लागू करेगी और यदि राज्य सरकारों ने उसका साथ नहीं दिया तो वह क्या करेगी।

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कोर्ट ने कहा कि केंद्र ने गंगा की सफाई को लेकर जो रूपरेखा पेश की है, उससे हम संतुष्ट हैं लेकिन इसे लागू किस तरह से किया जाएगा। सरकार इस मुद्दे पर अपना पक्ष स्पष्ट करे।
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जस्टिस टीएस ठाकुर की पीठ के समक्ष सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने कहा कि गंगा की सफाई के लिए सरकार पूरी तरह से प्रतिबद्ध है लेकिन गंगा को पूरी तरह से तब तक साफ नहीं किया जा सकता, जब तक संबंधित पांच राज्य सरकारें और वहां की जनता इसके प्रति अपनी प्रतिबद्धता नहीं दिखाती।
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केंद्र के हलफनामे पर सुप्रीम कोर्ट का सवाल

Ganga Cleaning Action Plan - Supreme Court ask Central Government to Share plan of Action

इस पर पीठ ने कहा कि यदि संबंधित पांच राज्यों में आपकी सरकार नहीं हो और वे केंद्र की बात नहीं मानें तो आप गंगा को कैसे साफ करेंगे। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि इसके लिए अदालत को निर्देश जारी करना चाहिए। तब पीठ ने कहा कि इसके अलावा कोई और रास्ता आपके पास नहीं है।

जवाब में सॉलिसिटर ने कहा कि सरकार केंद्रीय अधिकारों का प्रयोग कर सकती है। पीठ ने कहा कि तो फिर आप कोर्ट को निर्देश जारी करने को क्यों कह रहे हैं। पहले आप आधार बताइए कि सरकार योजनाएं कैसे लागू करेगी। अगर पांचों राज्यों में आपकी सरकार नहीं है तो कैसे योजनाओं को अंजाम देंगे।

पीठ ने कहा कि सिर्फ हलफनामा देने से गंगा साफ नहीं हो जाएगी, बल्कि आप कुछ ऐसा करें कि गंगा साफ होती दिखे। इससे पहले पीठ के समक्ष सॉलिसिटर जनरल ने केंद्र के हाल ही में दाखिल किए गए हलफनामे का उल्लेख किया। अदालत ने सुनवाई को 15 अक्तूबर तक के लिए टाल दिया।

'क्लीन गंगा फंड' से धन जुटाएगा केंद्र

Ganga Cleaning Action Plan - Supreme Court ask Central Government to Share plan of Action

निर्मल और स्वच्छ गंगा अभियान में धन की कमी को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार ने क्लीन गंगा फंड की स्थापना का ऐलान किया है। कैबिनेट की बुधवार को हुई बैठक में इससे संबंधित प्रस्ताव पर सहमति मिल गई।

फैसले के अनुसार क्लीन गंगा फंड के लिए स्थापित होने वाले ट्रस्ट की अगुवाई वित्त मंत्री अरुण जेटली करेंगे, जबकि इसका संचालन जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनरोद्धार मंत्रालय करेगा।

इस माध्यम से अप्रवासी भारतीयों, संस्थाओं और व्यक्ति विशेष से हासिल की गई रकम का उपयोग नमामि गंगे योजना के तहत गंगा की सफाई, वेस्ट ट्रीटमेंट, घाट निर्माण, अनुसंधान के साथ-साथ गंगा को प्रदूषण से मुक्त करने के लिए किया जाएगा।

फंड में दान की गई रकम स्वच्छ भारत कोष की तरह ही आयकर से मुक्त होगी। सरकार पहले ही नमामि गंगे के लिए 2037 करोड़ रुपये का आवंटन कर चुकी है। ट्रस्ट जल्द ही आम लोगों से गंगा की सफाई के लिए रकम दान करने की अपील करेगा।

सरकार का मानना है कि इस मद से जुटाई गई रकम से गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के अभियान को बड़ी ताकत मिलेगी।

सरकार को उम्मीद है कि देश भर की धार्मिक संस्थाओं के अलावा बड़ी संख्या में कारपोरेट संस्थान और अनिवासी भारतीय क्लीन गंगा फंड में दान देंगे।

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