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अब सबसे बड़ी अदालत करेगी दुर्गा का इंसाफ

Thu, 08 Aug 2013 01:04 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Thu, 08 Aug 2013 01:04 PM IST
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sc agrees to hear pil on suspension of durgashakti nagpal

आईएएस अधिकारी दुर्गाशक्ति नागपाल के निलंबन मामले पर दायर याचिका सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर ली है।

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कोर्ट ने बृहस्पतिवार को याचिका स्वीकार करते हुए सुनवाई के लिए 12 अगस्त की तारीख तय की है।

दुर्गाशक्ति के निलंबन के खिलाफ अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को याचिका दायर की गई थी। इसमें उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार को प्रतिवादी बनाया गया है।

याचिका में कहा गया है कि गौतमबुद्ध नगर की एसडीएम ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार अवैध रूप से बन रही इबादतगाह की दीवार को ढहाया और ऐसे में उनका निलंबन अदालत की अवमानना है।
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याचिका में नागपाल के निलंबन का आदेश देने वाले उत्तर प्रदेश सरकार के अफसरों के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई शुरू किए जाने का सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया गया है।

अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा ने याचिका में निलंबित अधिकारी के खिलाफ सारी कार्रवाई निरस्त करने का अनुरोध किया है।

याचिका के अनुसार भारतीय प्रशासनिक सेवा की 2010 बैच की 28 वर्षीय अधिकारी के खिलाफ की गयी कार्रवाई मनमानी, दुर्भावनापूर्ण और असंवैधानिक है।

गौतमबुद्ध नगर में एसडीएम पद पर तैनात दुर्गा शक्ति नागपाल ने जिले में रेत माफिया के खिलाफ अभियान चला रखा था।

उन्हें 27 जुलाई को नोएडा के एक गांव में निर्माणाधीन मस्जिद की दीवार कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बगैर ही गिराने का आदेश देने के कारण निलंबित कर दिया गया।

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उत्तर प्रदेश सरकार ने चार अगस्त को दुर्गा शक्ति नागपाल के खिलाफ चार्जशीट केंद्र सरकार को भेज दी। नागपाल को अपना पक्ष रखने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है।

निलंबित आईएएस अधिकारी के समर्थन में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखकर यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया है कि इस महिला अफसर के साथ नाइंसाफी नहीं होनी चाहिए।

याचिका में सुप्रीम कोर्ट के 20 सितंबर, 2009 और 16 फरवरी, 2010 के अलावा इस साल जनवरी में दिए आदेश का हवाला दिया गया है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों, सड़क तथा सरकारी भूमि पर बनने वाले पूजास्थलों को ढहाने का आदेश दिया था।

साथ ही सभी राज्य सरकारों को आदेश दिया था कि वह सरकारी भूमि पर अवैध रूप से बनने वाली इबादतगाहों के खिलाफ कार्रवाई करें।

याचिका में यह भी कहा गया है कि ईमानदार नौकरशाह मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था के तहत अपना संवैधानिक कर्तव्य निभाने में सफल नहीं हो पा रहे हैं। नागपाल का निलंबन निरस्त करने का आदेश सरकार को दिया जाए।

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